बिहार में शहरी क्षेत्रों से ज्यादा मतदान को लेकर ग्रामीण इलाकों में उत्साह

लोकसभा चुनाव में कुछ महीने शेष हैं। इस चुनाव में अधिक से अधिक मतदाताओं की भागीदारी का प्रयास किया जा रहा है। कहीं मेहंदी रची जा रही तो कहीं रंगोली बनाई जा रही है। कहीं रैली निकल रही है तो कहीं रथ चल रहा है। इसका कितना असर चुनाव में होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

Election History: दिलचस्प है चुनाव का इतिहास, जानें आजादी से पहले कैसे होता  था मतदान - Know the history of election before independence - GNT

लेकिन बीते 2019 और 2020 के चुनावों पर गौर करें तो लोकसभा से कुछ ज्यादा मत विधानसभा चुनाव में पड़े थे। शायद केंद्र से ज्यादा राज्य सरकार बनाने में लोगों की रुचि ज्यादा रही। लोकसभा चुनाव में जहां 51 प्रतिशत मत डाले गए थे वहीं अगले वर्ष 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में 51.12 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया। व्यास चंद्र की रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया है।

शहरी वोटरों में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं दिखा। लोकसभा की तरह विधानसभा चुनाव में भी शहरी क्षेत्र में मतदान प्रतिशत काफी कम रहा। कहीं 35 तो कहीं 36 प्रतिशत मत ही पड़े। यह स्थिति दीघा और बांकीपुर विधानसभा क्षेत्रों की रही। वहीं फतुहा, मनेर और बख्तियारपुर में मतदान की स्थिति ठीक-ठाक रही थी। महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में कम ही रही। अब इस बार प्रशासन के तमाम इंतजामों के असर का इंतजार करना पड़ेगा।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading