पटना. बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग का मसला अभी सुलझा नहीं है. महागठबंधन हो या एनडीए दोनों धड़ों में सीट शेयरिंग को लेकर अभी बातचीत का दौर जारी है. महागठबंधन से नीतीश कुमार के अलग हो जाने के बाद कांग्रेस और लेफ्ट जैसी पार्टियों की सीटो पर दावेदारी की संख्या बढ़ सकती है यह अनुमान पहले से ही लगाया जा रहा था. लेकिन, इस बीच भाकपा माले द्वारा सीट शेयरिंग का फार्मूला अपने हिसाब से तय किए जाने के बाद महागठबंधन के बड़े नेताओं की टेंशन बढ़ गई है. दरअसल, भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा है कि महागठबंधन में सीट शेयरिंग 3 मार्च को जन विश्वास रैली में पार्टियों की भागीदारी के हिसाब से तय की जानी चाहिए. भाकपा माले की इस डिमांड ने गठबंधन के दूसरे दलों के नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है.

हालांकि, कांग्रेस ने भाकपा माले की डिमांड को सिरे से खारिज कर दिया है. कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी का कहना है कि रैली के दिन भीड़ महागठबंधन के सभी दलों के समर्थन में थी और इस आधार पर सीट शेयरिंग का फार्मूला तय करना संभव नहीं है. राष्ट्रीय जनता दल भी भाकपा माले के इस फॉर्मूले पर खुलकर नहीं बोल रहा. पार्टी प्रवक्ता एजाज अहमद की मानें तो तेजस्वी यादव के नेतृत्व में जन विश्वास रैली के माध्यम से महागठबंधन ने अपनी ताकत दिखाई है.
जीतन राम मांझी के ‘खेल’ में फंसा महागठबंधन
दरअसल, जन विश्वास रैली में माले के कार्यकर्ताओं -समर्थकों की उमड़ी भीड़ और पार्टी झंडे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी सोशल मीडिया X पर टिप्पणी की थी. मांझी ने तंज भरे अंदाज में दावा किया था कि भीड़ सबसे ज्यादा भाकपा माले की थी. जीतन राम मांझी के बयान से भी उत्साहित भाकपा माले अब महागठबंधन के नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है.

भाकपा माले ने हाथोंहाथ उठा ली मांझी की बात
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने दो टूक शब्दों में कहा है कि परिस्थितियां बदली हैं और ऐसे में सीटों का बंटवारा सही तरीके से होना चाहिए. सूत्रों की मानें तो भाकपा माले झारखंड में तो केवल एक, लेकिन इन बिहार में कम से कम 5 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है और इसको लेकर दावेदारी भी कर रही है.
