लोकसभा चुनाव को लेकर एनडीए में सीट बंटवारे पर मंथन जारी है। बिहार में 40 सीटों पर सीट शेयरिंग बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती साबित होने वाली है। क्योंकि एनडीए में भाजपा को मिलाकर 6 दल है। नीतीश की जेडीयू के भी एनडीए में शामिल होने से सीट बंटवारा और मुश्किल होता दिख रहा है। वहीं दूसरी तरफ चिराग पासवान और पशुपति पारस के बीच हाजीपुर सीट पर छिड़ी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। दोनों चाना-भतीजे ही हाजीपुर को अपनी स्वाभिमान की सीट बता रहे हैं। लोजपा (आर) के अध्यक्ष पशुपति पारस हाजीपुर से सांसद हैं। और वो किसी कीमत पर अपनी सीट छोड़ने के राजी नहीं है। वहीं चिराग पासवान ने अपने पिता रामविलास पासवान की विरासत बताकर दावा ठोंक दिया है।

जानकारी के मुताबिक इस बीच पशुपति पारस ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े से मुलाकात की। जिसमें उन्होने साफ कर दिया कि वो हाजीपुर की सीट किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। वहीं विनोद तावड़े ने पशुपति पारस को भतीजे चिराग पासवान के साथ हो जाने की सलाह की। और दोनों पार्टियों के एक हो जाने की बात कही। हालांकि भाजपा का एनडीए में न तो चिराग पासवान के रहने का कोई विरोध है, और न ही पशुपति पारस के रहने का कोई विरोध है।

लेकिन बीजेपी चाहती है कि दोनों पार्टियां एक हो जाएं। लेकिन इस प्रस्ताव को मानने दोनों के लिए बड़ा मुश्किल नजर आ रहा है। इससे पहले पशुपति पारस कह चुके हैं कि चिराग के साथ अब पार्टी, दिल और परिवार नहीं मिल सकते हैं। वहीं आज दिल्ली में सीट बंटवारे को लेकर बैठक है। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा चाचा-भतीजे के बीच फंसी हाजीपुर सीट को कैसे निकालती है।
वहीं इन दिनों बीजेपी को लेकर चिराग की नाराजगी भी कई बार सामने आ चुकी है। फिर चाहे वो पीएम मोदी की बिहार रैलियों में शामिन न होना हो। या फिर नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होना हो। इन दोनों मौकों पर चिराग अपनी नाराजगी जता चुके हैं। वैशाली की रैली में चिराग ने कहा था कि उनकी गठबंधन बिहार की जनता के साथ है। चाचा-भतीजे के बीच जारी रार, नीतीश के एनडीए में शामिल होने, जीतन मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की डिमांड के आगे देखना होगा कि सभी को खुश रखते हुए एनडीए में सीटों का बंटवारा कैसा होगा।

