मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही लीची खाने के इंतजार में हैं, तो इस खबर से आपको थोड़ी मायूसी होगी. अप्रैल में पड़ रही भीषण गर्मी और पछुआ हवा बहने के कारण लीची के उन्नत और अधिक फलन पर खतरा मंडरा रहा है. अव्वल तो इस बार देर तक ठंड पड़ने और फिर गर्मी शुरू होने के कारण लीची में मंजर आने में देर हुई. अब मंजर आने के साथ ही गर्मी भी तेजी से बढ़ गई है. इस वजह से लीची के बेहतर फलन और उसके आकार में वृद्धि के लिए जितनी नमी चाहिए, उतनी नहीं मिल रही है. इससे किसान हताश और परेशान हैं. लगातार पटवन और स्प्रे कर वे लीची के छोटे-छोटे फलों को झड़ने से बचा रहे हैं.

एक्सपर्ट ने बताया-लीची खत्म होने की है संभावना
लीची के लिए सामान्य 30 से 35 डिग्री तापमान होना चाहिए. लेकिन इस बार तापमान इससे ज्यादा है. इससे लीची खत्म हो रही है. भीषण गर्मी के कारण मंजर में आया लीची का दाना सूखकर झड़ने लगा है. इस कारण लीची दाना के आकार में वृद्धि की गति भी रूक सी गई है.वे बताते हैं कि बारिश नहीं होने पर बढ़ रहे तापमान से लीची के पैदावार पर असर पड़ सकता है.

लीची में करते रहे पटवन और स्प्रे
इसके बचाव के लिए समय-समय पर किसानों को लीची के बागान में पटवन और स्प्रे करना चाहिए. नहीं तो लीची के फटने भी भी इंकार नहीं किया जा सकता है. वे बताते हैं कि पिछले कई वर्षों में पहली बार लगातार इतनी गर्मी पड़ने के कारण लीची के दाना का जो साइज होना चाहिए, वो अब तक नहीं हो पाया है. जितनी नमी चाहिए, बागान में उतनी नमी नहीं मिलने से लीची के पेड़ में आया दाना झड़ रहा है. जबकि बीते साल इस सप्ताह तक लीची के आकार बड़े हो गए थे. उन्होंने बताया कि सरकार को भी इस स्थिति में किसानों की मदद करनी चाहिए.







