बिहार हमेशा से ही अपनी यूनीकनेस के लिए जाना जाता है। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी वहां एक यूनीक बात दिखी है। इस बार यहां पर चार ऐसे लोकसभा उम्मीदवार हैं, जिन्होंने एक अनोखा बदला पूरा किया है। इन्होंने इस बार उन सांसदों को हराया है, जिससे वह पिछली बार हार गए थे। इसमें सबसे अनोखी मिसाल तो लालू यादव की बेटी मीसा भारती बनी हैं। उन्होंने अपने साथ-साथ पिता का भी बदला चुकाया और पाटलिपुत्र सीट पर पहली बार आरजेडी को जीत दिलाई।

लालू की बेटी का कमाल
बिहार में इस चुनाव में कई प्रत्याशियों ने अपनी पिछली हार का हिसाब बराबर कर लिया। उन्होंने पिछले चुनाव में सांसद बनने की राह में बाधा बनने वाले सांसदों को हराकर उनका ही रास्ता रोक दिया। इसमें एनडीए और महागठबंधन दोनों ओर के उम्मीदवार शामिल हैं। सबसे बड़ा उलटफेर तो लालू प्रसाद की पुत्री मीसा भारती ने किया। उन्होंने भाजपा सांसद रामकृपाल यादव से न केवल पिछली हार का बदला लिया बल्कि पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर पहली बार राजद को जीत दिलायी। वे पिछले दो चुनाव से हार रही थीं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि पाटलिपुत्र सीट पर उनके पिता लालू प्रसाद भी राजद को जीत नहीं दिलवा सके थे।

हिसाब बराबर
कुछ ऐसी ही कहानी जहानाबाद से आरजेडी के उम्मीदवार सुरेन्द्र यादव की भी है। पिछले चुनाव में उन्हें जेडीयू के चन्देश्वर चन्द्रवंशी ने शिकस्त दी थी। इस बार सुरेन्द्र ने चंद्रेश्वर प्रसाद को एक लाख 42 हजार 591 वोटों से हराया। इसी तरह मुजफ्फरनगर में पिछली बार भाजपा के अजय निषाद ने वीआईपी के राजभूषण निषाद को पराजित किया था। इस बार भाजपा ने अजय निषाद का टिकट काटकर राजभूषण निषाद को ही अपना उम्मीदवार बनाया। राजभूषण निषाद ने अजय निषाद को पराजित कर हिसाब बराबर कर लिया। कटिहार में कांग्रेस के तारिक अनवर ने जदयू के दुलाल चन्द गोस्वामी को पराजित किया है। 2019 में गोस्वामी ने उन्हें हराया था। इस बार तारिक ने हिसाब चुकता कर लिया।









