पटनाः एनडीए में शामिल होने से पहले तक खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग पासवान सच में हनुमान निकले. हालांकि ये कहना तो अतिश्योक्ति होगी. लेकिन चिराग पासवान बीजेपी के संकट हारण से कम भी नहीं हैं, वो भी तब जब बीजेपी बहुमत से दूर रह गई है. बीजेपी के सहयोगी दलों में टीडीपी और जदयू को लेकर हर कोई आशंकित है. लेकिन चिराग पासवान को लेकर सभी आश्वस्त हैं. बिहार में चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी का लोकसभा चुनाव में स्ट्राइक रेट 100 प्रसेंट रहा है.

पांच सीट पर लड़ा चुनाव और सभी जीत लिए
लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी ने कुल पांच सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें हाजीपुर, जमुई, खगड़िया, समस्तीपुर और वैशाली शामिल है. हाजीपुर में चिराग पासवान जीते, तो जमुई में उनके जीजा अरुण भारती भी जीत गए. इसके अलावा खगड़िया से राजेश वर्मा, समस्तीपुर से शांभवी चौधरी और वैशाली से वीणा देवी ने चुनाव में जीत हासिल की.

सभी उम्मीदवारों ने 1 लाख से अधिक वोटों से हासिल की जीत
हाजीपुर में चिराग पासवान ने राजद के उम्मीदवार शिवचंद्र राम को 1 लाख 70 हजार 105 वोट से हराया है. जमुई में अरुण भारती ने राजद प्रत्याशी अर्चना कुमारी को 1 लाख 12 हजार 482 वोट से हराया है. समस्तीपुर में शांभवी चौधरी ने कांग्रेस के उम्मीदवार सनी हजारी को 1 लाख 87 हजार 251 वोट से हराया है. वहीं खगड़िया में लोजपा उम्मीदवार राजेश वर्मा ने सीपीआई माले के प्रत्याशी संजय कुमार को 1 लाख 61 हजार 131 मतों से हराया है. वहीं वैशाली में लोजपा उम्मीदवार वीणा देवी ने राजद के प्रत्याशी विजय कुमार उर्फ मुन्ना शुक्ला को 89634 वोटों से हराया है.

पार्टी में टूट के बाद भी चिराग बीजेपी के साथ रहे
बता दें कि चिराग पासवान लंबे समय से एनडीए को अघोषित समर्थन दे रहे थे. हालांकि पार्टी में टूट होने के कारण बीजेपी चिराग के चाचा पशुपति पारस के गुट को अपने में शामिल कर लिया. लेकिन इस बार सीट बंटवारे में जब पशुपति पारस के गुट को सीट नहीं मिली तो उन्होंने बीजेपी से नाता तोड़ दिया. इसके बाद बीजेपी ने चिराग पासवान को अपने में शामिल कर लिया. हालांकि कुछ दिनों बाद पशुपति पारस ने फिर से बीजेपी के साथ आने का ऐलान कर दिया और अपने भतीजे चिराग के साथ चुनाव प्रचार भी किया.

नई सरकार में चिराग की क्या होगी भूमिका?
बिहार में बीते लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान ने उन जगहों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे, जहां बीजेपी के उम्मीदवार थे. हालांकि चिराग की पार्टी के उम्मीदवार जदयू के खिलाफ जमकर चुनाव लड़े और भारी नुकसान पहुंचा दिया. इसके कारण बिहार में जदयू का कद छोटा हो गया और वहीं बीजेपी बिहार की बड़ी पार्टी बनकर उभर गई. ऐसे में खुद को पीएम मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग पासवान को इस नई सरकार में क्या भूमिका मिलती है, इसपर हर किसी की नजर है.









