पटना: 20 जून को नीतीश सरकार को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब पटना हाईकोर्ट ने 65 प्रतिशत जातीय आधारित आरक्षण को रद्द करने का फैसला सुनाया. अब बिहार सरकार इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने वाली है. बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट तौर पर मानना है कि बिहार में पिछड़ों, अति पिछड़ों दलितों और आदिवासियों का आरक्षण बढ़ना चाहिए.
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‘बिहार सरकार जाएगी सुप्रीम कोर्ट’- सम्राट चौधरी
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में सबको आरक्षण है. इसलिए बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी और सुप्रीम कोर्ट से बिहार के लोगों को न्याय दिलाने का काम करेगी. वहीं सम्राट ने तेजस्वी यादव के हमले का भी जवाब देते हुए कहा कि उनके (तेजस्वी यादव) पिताजी ने 15 साल तक तो कोई काम नहीं किया. 15 साल में एक व्यक्ति को आरक्षण नहीं दिया. लालू का मतलब है आरक्षण विरोधी. अपराध के समर्थक लालू प्रसाद हैं, गुंडागर्दी का प्रतीक लालू हैं.

पटना हाईकोर्ट ने रद्द 65% जातीय आधारित आरक्षण कानून
बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के शिक्षण संस्थानों व सरकारी नौकरियों में एससी, एसटी, ईबीसी व अन्य पिछड़े वर्गों को 65 प्रतिशत आरक्षण देने के नीतीश सरकार के कानून पर अपना फैसला सुनाया. इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं को स्वीकार करते हुए बिहार सरकार द्वारा लाए गए इस कानून को चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने रद्द कर दिया. मामले में गौरव कुमार व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद 11 मार्च 2024 को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. फैसला 20 जून को सुनाया गया.








