पटना: बिहार में बाढ़ से हाहाकार मचने लगा है. पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मधुबनी और कोसी-सीमांचल के कई जिलों में स्थिति चिंताजनक है. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंडक, कोसी, बागमती, महानंदा, परमान जैसी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को जरूरी सहायता का निर्देश दिया. वहीं, बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी का कहना है कि साल 2004 के बाद नेपाल क्षेत्र में इस बार सबसे अधिक बारिश हुई है और उसके कारण ही परेशानी बढ़ रही है.
2004 के बाद नेपाल से रिकॉर्ड पानी डिस्चार्ज
नेपाल में जब भी बारिश होती है, तब बिहार की मुश्किलें बढ़ जाती है. पूर्व जल संसाधन मंत्री संजय झा से लेकर वर्तमान मंत्री विजय कुमार चौधरी का भी कहना है कि पिछले चार-पांच दिनों में नेपाल में भारी बारिश हुई है. इस वजह से कोसी बराज में 3:65 लाख क्यूसेक के करीब और गंडक बराज में चार लाख 40 लाख क्यूसेक रिकॉर्ड पानी आ गया है, जो पिछले 15 सालों में नहीं आया था.
नदियों का जलस्तर बढ़ा
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंडक नदी गोपालगंज जिले के डुमरिया घाट में खतरे के निशान से 106 सेंटीमीटर ऊपर है. वहीं बागमती नदी मुजफ्फरपुर जिले के रुन्नीसैदपुर में खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर ऊपर है. बागमती नदी बेनीबाद में 89 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. कोसी नदी खगड़िया जिले के बलतारा में खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर है. महानंदा नदी किशनगंज जिले के तैयबपुर में खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर है. महानंदा नदी पूर्णिया जिले के ढेंगरा घाट में 96 सेंटीमीटर ऊपर है, इसमें और वृद्धि होने की संभावना है. वहीं कटिहार जिले के झावा में महानंदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. परमान नदी अररिया में खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर है.





