मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में अपराधियों ने पुलिस की नाक के नीचे बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। यहां विश्वविद्यालय थाना के ठीक सामने स्थित बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति के आवास पर रविवार की रात बमबाजी की गई। स्कूटी से आए दो बदमाशों ने आवास के गेट पर सुतली बम फेंका। सीसीटीवी में स्कूटी सवार बम फेंकते दिखे हैं। आवास के ठीक सामने विवि थाना है। काफी देर तक थाने से कोई नहीं आया। सुतली बम फेंक कर बदमाशों ने कुलपति को हत्या की धमकी दी गई है।

इधर इस बमबाजी सूचना पर पुलिस टीम सुबह में आवास के गेट पर एफएसएल की टीम लेकर जांच के लिए पहुंची। एफएसएल की टीम ने गेट से जली हुई सुतली और बारूद के अंश को जब्त किया है। एसडीपीओ टाउन 1 सुरेश कुमार और सिटी एसपी ने भी घटना स्थल का निरीक्षण किया है। पुलिस को आशंका है कि विश्वविद्यालय में खींचतान की राजनिति, ठेकेदारी हथियाने के खेल और योजना में लूट-खसोट को लेकर की गई कार्रवाई के बाद इस तरह दहशत फैलाने की कोशिश की गई है। पुलिस टीम इन तीन बिंदुओं पर मामले की जांच कर रही है। विवि थानेदार ने बताया कि रात 10 बजे के बाद स्कूटी से आए दो बदमाशों ने कुलपति के आवास के गेट के पास बम फेंका। घटना की जांच की जा रही है।

विवि से गायब फाइल पारू के युवक को कैसे मिली
इधर बीआरएबीयू से साजिश रचकर फाइल गायब की जाने की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है। गायब फाइल के कुछ भाग की प्रति पारू के प्रशांत कुमार को कैसे मिली? क्या विवि प्रशासन में से किसी अधिकारी या कर्मचारी ने प्रशांत को फाइल की प्रति उपलब्ध कराई थी? इसमें पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि फाइल गायब होने के लंबे समय बाद विवि प्रशासन ने एफआईआर क्यों कराई है। केस में एसडीपीओ टाउन वन सुरेश कुमार पर्यवेक्षण रिपोर्ट जारी करेंगे। इसके लिए विवि थानेदार प्रारंभिक केस डायरी तैयार कर रहे हैं।

विवि में काम करने वाली लखनऊ की एक निजी कंपनी से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइल 18 दिसंबर 2024 को कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन डॉ. सुबालाल पासवान को रिसीव कराई गई थी। विवि प्रशासन को जुलाई 2025 में ही फाइल के गायब होने की जानकारी हो गई थी।

इस संबंध में तत्कालीन कंट्रोलर से स्पष्टीकरण भी मांगी गई। विवि प्रशासन ने गायब फाइल को तलाशने व इसके पीछे के खेल की जांच के लिए 22 जुलाई 2025 को उच्च स्तरीय जांच कमेटी भी बनाई। कमेटी ने 20 सितंबर 2025 को रिपोर्ट भी विवि प्रशासन को सौंप दी। इसमें कमेटी ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक की लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की अनुशंसा भी की।