पटना: आईएएस अधिकारी के पाठक का नाम एक बार फिर नेताओं की जुबान पर आ गया है. उनके शिक्षा विभाग के एसीएस पद पर रहते विभाग में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगा है. विधान परिषद में मुद्दा उठने पर खुद शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर उचित कार्रवाई की जाएगी. बता दें कि बिहार विधान परिषद के मानसून सत्र के अंतिम दिन विधान परिषद के सदस्य संजीव कुमार सिंह ने शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितता को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया आगे कि केके पाठक के रहते शिक्षा विभाग में सामानों की खरीदरादी के नाम पर बहुत बड़ा घोटाला किया गया है. इसपर शिक्षा विभाग के मंत्री ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

बता दें कि संजीव सिंह ने आरोप लगाया कि ₹120 के बेग को ₹1200 में खरीदा गया. 30 रुपए की थाली का दाम ₹70 बताया गया. संजीव सिंह ने यह आरोप शिक्षा विभाग के पूर्व अपर मुख्य सचिव केके पाठक के कार्यकाल में लिए गए फैसले पर लगाया है. इसका जवाब शिक्षा मंत्री सुनील कुमार सिंह ने भी सदन में दिया. सुनील कुमार ने कहा कि जहां से भी अनियमितताओं की शिकायतें मिलीं हैं, वहां कार्रवाई हो रही है.

बता दें कि शिक्षा विभाग के तत्कालीन एसीएस केके पाठक के निर्णय को असंवैधानिक बताते हुए कई संज्ञेय आरोप लगाए गए हैं. बेंच, डेस्क और थाली खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए भाजपा एमएलसी नवल किशोर यादव ने भी शिक्षा विभाग में करोड़ों के घोटाले की जांच कमेटी के जरिए करने की मांग की है. उन्होंने कहा सबमर्सिबल, बेंच, डेस्क और बैग जैसे सामानों में काफी घोटाला किया गया है. हमने मांग की है कि कमेटी बनाकर जांच कराई जाए.

इस पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा है कि जहां से भी अनियमितता की शिकायत आ रही है वहां कार्रवाई हो रही है. जहां बेंच, डेस्क वगैरह में गड़बड़ी हुई है वहां भी हमने चिट्ठी लिखी है और जहां भी गलती पाई जाएगी संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी.बहरहाल, शिक्षा मंत्री के बयान के बाद उम्मीद है कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. हालांकि, सदन में एक और घोटाले के आरोपों के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है.



