युवाओं को मिली नई सौगात,बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर का हुआ उद्घाटन

पटना: बिहार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, पटना के द्वारा इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर (तारामंडल) में एक समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह के दौरान “नवीन आधुनिक एवं उन्नत जीआईएस लैब एवं प्रशिक्षण केंद्र बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर”की स्थापना की गई। इसका उद्घाटन सुमित कुमार सिंह विज्ञान प्राविधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के द्वारा किया गया ।

इस केंद्र के शुभारम्भ का उद्देश्य अत्याधुनिक जीआईएस तकनीकों के माध्यम से बिहार के विकास में योगदान देना है। इस नई लैब और प्रशिक्षण केंद्र से युवाओं को नई तकनीकों में प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे राज्य में तकनीकी विशेषज्ञता में वृद्धि होगी। यह पहल बिहार को विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊँचाई पर ले जाएगी और हमारे राज्य के विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।

बिहार रिमोट सेन्सिग एप्लीकेशन केन्द्र में स्थापनाकाल के अधिष्ठापित हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर को नये तकनीक के अनुरूप उन्नयन तथा प्रयोगशाला स्थापना किए जाने हेतु वित्तीय वर्ष 2017-2018 में रू0 754.71 लाख का अनुदान प्राप्त है। बिहार रिमोट सेन्सिग एप्लीकेशन केन्द्र का नए तकनीक के अनुरूप उन्नयन तथा प्रयोगशाला स्थापना के पश्चात राज्य में वन-अच्छादन, उपयोगी अनुपयोगी भूमि, वेस्ट लैण्ड, ईट भटटा, खनिज पदार्थ आदि के विस्तृत सर्वेक्षण और बाढ़ एवं सुखार, टाल क्षेत्रों, पहाड़ी भूमि आदि के मानचित्रण में सहयोग प्राप्त होगी।

वर्तमान में बिहार रिमोट सेन्सिग एप्लीकेशन केन्द्र में संचालित परियोजनाओं

राज्य के सभी 38 जिलों में तृतीय चरण में वन एवं वृक्षो से अच्छादित क्षेत्रों का मानचित्रण एवं आकड़े की उपलब्धता (वन एवं पर्यावरण विभाग, बिहार योजना लागत राशि रू० 1.84 करोड़)। बिहार राज्य में फसल अवशेष जलाने का वास्तविक समय में आकलन तथा अनुश्रवण (कृषि विभाग, बिहार योजना लागत रू0 88.55 लाख)। राज्य के सभी जल स्त्रोतों का सेटेलाईट मानचित्रण (मतस्य विभाग, बिहार योजना लागत रू0 30.00 लाख)।

बिहार राज्य अन्तर्गत सोन नदी के रेत भंडार क्षेत्रो के मानचित्रण (खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार योजना लागत रू0 16.91 लाख)।  बिहार राज्य फसल सहायता योजना (सहकारिता विभाग, बिहार प्रस्तावित योजना लागत रू0 47.58 लाख)।इस मौके पर विज्ञान, प्रावैद्यिकी और तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह (आईएएस), निदेशक-सह-विशेष सचिव, श्री उदयन मिश्रा (आईएएस) और इसरो के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक भी मौजूद थे।

  

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