पटना में बंद हो सकते हैं 138 कोचिंग संस्थान, निबंधन के लिए अयोग्य घोषित

पटना: दिल्ली कोचिंग हादसे के बाद से पटना में भी कोचिंग संस्थान मानक के अनुरूप चल रहे हैं या नहीं, इसको लेकर गठित सात टीमें कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण कर रही है. कोचिंग संस्थानों को संचालन के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है.

निरीक्षण के क्रम में कई कोचिंग संचालक गैर रजिस्टर्ड पाए गए थे. ऐसे में यह पता चला है कि जिला में कोचिंग संस्थानों के निबंध के लिए कुल 936 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें 413 का पूर्व में ही निबंध हो चुका है और बचे हुए 523 आवेदन में 138 की जांच की गई.

पटना में 138 कोचिंग संस्थान अयोग्य

इस जांच में यह सभी 138 कोचिंग संस्थान निबंध के लिए अयोग्य पाए गए और आवेदन अस्वीकृत कर दिया गया है. बाकी बचे 385 आवेदन की जांच हो रही है, जिसमें 46 का जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है और 339 का आवेदन प्रक्रियाधीन है. अब इन संस्थानों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है.

508 कोचिंग संस्थानों की जांच

कोचिंग संस्थानों के चल रहे निरीक्षण को लेकर शुक्रवार को पटना डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने समीक्षा बैठक की. अब तक के 10 दिनों में 508 कोचिंग संस्थानों की जांच की गई है. सभी अनुमंडल में अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में और पटना मुख्यालय के शहरी क्षेत्र में अपर जिला दंडाधिकारी, आपदा प्रबंधन की अध्यक्षता में टीम कोचिंग संस्थानों की जांच कर रही है. डीएम ने निर्देशित किया है कि कोचिंग के संचालन में सुरक्षा मानकों का अनुपालन अनिवार्य है और बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम 2010 के प्रावधानों के अनुसार कोचिंग का संचालन होना चाहिए.

किन बिंदुओं पर चल रही है जांच?

डीएम ने बताया कि बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम के तहत कोचिंग संस्थानों की स्थापना और निबंध को लेकर दिशा निर्देश है. इसके तहत वही कोचिंग संस्थान संचालित होंगे, जो रजिस्टर्ड होंगे और कोचिंग संस्था की आधारभूत संरचना के अधीन क्लासरूम में एक छात्र के लिए न्यूनतम एक स्क्वायर मीटर क्षेत्र होना चाहिए. साथ ही क्लास में एंट्री और एग्जिट के लिए गेट और रोड मुक्त होना चाहिए और बिल्डिंग बायलॉज का अनुपालन होना चाहिए. वहीं, कोचिंग संस्था में अग्नि सुरक्षा के मानकों का अनुपालन सुनिश्चित होना चाहिए.

क्या बोले पटना डीएम?

इस बारे में पटना डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि यदि इन तीन मानकों में किसी का उल्लंघन होता है तो बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. यदि कोई कोचिंग संस्थान में कमी पाई जा रही है तो उन्हें नोटिस दिया जा रहा है. नोटिस प्राप्ति के बाद उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जा रहा है.

 बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम 2010 के किसी प्रावधान का उल्लंघन हो रहा है तो पहली बार ₹25000 जुर्माना का प्रावधान है. दूसरी बार में ₹100000 जुर्माना का प्रावधान है और आगे निबंधन रद्द किए जाने का भी प्रावधान है.

बीते दिनों कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों का पक्ष सुना गया है और उन्हें कोचिंग संस्थान का संचालन मानक प्रक्रिया के अनुसार किए जाने के लिए समय दिया गया है. विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. ऐसे में हमलोग ये सुनिश्तिच कर रहे हैं कि बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम 2010 के प्रावधानों के अनुसार ही कोचिंग का संचालन होना चाहिए. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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