देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम है. कान्हा की नगरी मथुरा से लेकर बाबा विश्वनाथ के शहर बनारस तक जय श्री कृष्ण की गूंज सुनाई दे रही है. सोमवार को मध्यरात्रि में मंदिर से लेकर घरों तक कान्हा का जन्म दिवस मनाया जाएगा और हर तरफ भक्त इस उत्सव के रंग में रमे दिखेंगे.

खीरे से जन्म के बाद हर घर में कान्हा का अभिषेक होता है. आइये जानें जन्माष्टमी पर कान्हा के अभिषेक का सही समय क्या है. साथ ही आज एक दुर्लभ योग बन रहा है इस दुर्लभ योग में पूजा करने से 3 जन्मों के पाप कट जाते हैं.

द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि में मामा कंस की जेल के अंदर कान्हा का जन्म हुआ था. इस साल 26 अगस्त को मध्यरात्रि में 12 बजे यह सभी योग मिल रहे हैं. ऐसे में 12 बजे से 12 बजकर 30 मिनट तक आप घर में कान्हा के जन्म के बाद पंचामृत से उनका अभिषेक कर सकते हैं.

4 चीजों से करें कान्हा का अभिषेक
इसके लिए आपको सभी तैयारियां 11 बजकर 45 मिनट तक पूरी कर लेनी होगी. उसके बाद जैसे ही मध्यरात्रि में 12 बजेगा वैसे शंख, घंटी की आवाज के बीच खीरे से कान्हा के जन्म होगा. उसके बाद दूध, दही, घी ,शक्कर से उनका अभिषेक शुरू करना चाहिए.

इस योग में करें पूजा
इस बार जन्माष्टमी में मध्य रात्रि में जयंति नामक योग का निर्माण भी हो रहा है .धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह योग बेहद दुर्लभ और अद्भुत होता है. इस योग में चतुर्भुज रूप में भगवान श्री कृष्ण की पूजा और आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसके अलावा उनके तीन जन्मों के पाप भी कट जाते है.

