गया में स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़ सकती है, क्यों कि एंबुलेंसकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं। इस नाराजगी की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि चार महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब उनके अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से गया में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी है।

चार महीनों से नहीं मिला वेतन, डीएम से भी लगाई थी गुहार
बिहार राज्य चिकित्सा कर्मचारी संघ (इंटक) 102 एंबुलेंस के कर्मियों ने एक बैठक कर सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। सभी एम्बुलेंसकर्मियों को पिछले चार महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। इसी बात को लेकर ये लोग नाराज हैं। मंगलवार से सभी एम्बुलेंसकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इस दौरान अब रेफर होने वाले मरीजों का क्या होगा? एंबुलेंस कर्मियों के हड़ताल पर जाने से मरीज और उनके परिजन खासे परेशान हैं। एंबुलेंस कर्मियों ने इससे पूर्व डीएम और सिविल सर्जन को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि वेतन का शीघ्र भुगतान किया जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

सिविल सर्जन को दिया था अल्टीमेटम
102 एंबुलेंस संघ के कार्यकारी अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने बताया कि चार महीने का वेतन कंपनी ने अभी तक नहीं दिया है, जिसके कारण सभी कर्मियों का हाल बुरा है। इनके घरों में भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। उन्होंने बताया कि सिविल सर्जन से अनुरोध किया गया था कि हमलोगों का बकाये वेतन का भुगतान नहीं हुआ तो 10 सितंबर से वे सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। हमारी बातें नहीं सुनी गई तब हमलोग मजबूरन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल पर जाने से रेफर होने वाले मरीजों की परेशानी काफी बढ़ गई है।
यह है 102 एंबुलेंस कर्मियों की मांग
1- चार माह का बकाया वेतन भुगतान की मांग
2- ईपीएफ का बकाया राशि का भुगतान।
3- श्रम कानून के तहत कार्य लेना।
4- ठेका प्रथा बंद हो।
5- सभी एंबुलेंस को सही समय पर मरम्मत करना।
की गई है वैकल्पिक व्यवस्था
इस संबंध में गया के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि 102 एंबुलेंस चालकों को समझाया जा रहा है। उनकी मांगों पर विचार किया जा रहा है। शीघ्र ही उनके बकाये वेतन का भुगतान किया जाएगा। एक से दो दिनों में हड़ताल समाप्त कर दिया जायेगा। तत्काल आपात स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, ताकि रेफर होने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।