पितृपक्ष में मोक्षस्थली के रूप में चर्चित गयाधाम में अपने पूर्वजों की मृतात्मा की शांति के लिए पिंडदान करने आने वाले तीर्थयात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। इसके लिए जिला प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस वर्ष देश दुनिया से गयाजी आने वाले तीर्थयात्रियों को पीने के लिए गंगाजल के साथ-साथ गंगाजल घर ले जाने को भी मिलेगा। इसके अलावा पवित्र सीताकुंड, रामशिला, विष्णुपद पाथ-वे समेत विभिन्न पिंडवेदियों और मेला क्षेत्र के दिवालों पर मिथिला पेंटिंग से माता सीता के जीवन को रेखांकित किया गया है। साथ ही इसके अलावे प्रभु श्री राम और कृष्ण की बाल लीलाएं को भी देखने को मिलेगा।

आर्कषण का केंद्र होगा मिथिला पेंटिंग
इस साल गयाजी आने वाले तीर्थयात्रियों को भक्तिमय माहौल बनाने के लिए जिला प्रशासन हर संभव प्रयास कर रही है। इसी क्रम में रबर डैम के पूर्वी छोर पर स्थित सीताकुंड को जाने वाले पथ पर मिथिला की पेंटिंग नजर आ रही है। पेंटिग की थीम माता सीता की जीवनी से जुड़ी है। रामायण की चौपाइयों पर आधारित घटनाओं के आधार पर मिथिला पेंटिंग की गई है। साथ ही रामशिला तालाब और विभिन्न पिंडवेदियों के आसपास प्रभु श्री राम और कृष्ण की बाल लीलाओं को दर्शाया जा रहा है। इसके साथ ही मिथिला पेंटिंग में शिवलिंग का पूजा करते प्रभु श्रीराम, बाल अवस्था में श्रीराम वनवास जाते और अशोक वाटिका समेत रामलीला और कृष्ण लीलाओं को दर्शाया जा रहा है। उक्त पेंटिंग से देश दुनिया से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए आर्कषित करेगी।

17 सितंबर से शुरू होगी पितृपक्ष मेला
मालूम हो कि इस वर्ष 17 सितंबर से गयाजी में पितृपक्ष मेला का शुभारंभ होगा। जो दो अक्टूबर को समाप्त होगा। इस वर्ष पीछले वर्ष से 15 लाख से अधिक पिंडदानियों की आने की संभावना जताई जा रही है। इसी को ध्यान में रखकर जिला प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है।