वैसे तो माता सबकी मुरादें पूरी करती हैं. लेकिन, छपरा का गढ़देवी मंदिर बेरोजगार युवकों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है. ऐसी मान्यता है कि नवरात्र के दौरान बेरोजगार युवक अगर मंदिर में श्रमदान करेंगे तो माता प्रसन्न होकर उनको नौकरी देंगी. यह मंदिर छपरा के मढौरा में स्थित है. इस मान्यता के कारण मंदिर में प्रतिदिन नवरात्र के दौरान श्रमदान करने वाले युवकों की भीड़ लगती है. कोई मंदिर की सफाई करता है तो कोई पोंछा लगाता है.
युवकों के अनुसार माता के आशीर्वाद से इलाके के कई युवक सरकारी नौकरी में है. उन सभी ने माता के मंदिर में श्रमदान किया था, जिसका फल उनको नौकरी के रूप में मिला. मंदिर के पुजारी भी गढ़ देवी माता के इस चमत्कार की पुष्टि करते हैं. उनका कहना है कि सैंकड़ों युवक जिन्होंने इस मंदिर में अपना श्रमदान किया और आज वे लोग सरकारी नौकरी में है. नौकरी के बावजूद में माता की सेवा करने के लिए नवरात्रि में गांव आते हैं.

माता ने यहीं किया था विश्राम
बता दें, छपरा के मढ़ौरा में शक्तिपीठ मां गढ़देवी का ऐतिहासिक मंदिर है, जहां ऐसे तो सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन नवरात्र में यहां भक्तों की भारी भी माता के दर्शन के लिए पहुंचती है. इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है.

शक्ति पीठ मंदिर थावे के रहसू भगत के बुलावे पर माता कौड़ी कामाख्या से चलकर जगह-जगह विश्राम करते हुए थावे गई थी. इस दौरान माता ने थावे पहुंचने से पहले मढ़ौरा के इसी गढ़देवी मंदिर के पावन स्थल पर विश्राम किया था. यहीं वजह है कि यहां माता की दो-दो पिंडिया स्थापित हैं और यह स्थल सिद्ध शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है.

देश में है खास पहचान
वैसे तो सभी मंदिरों के मुख्य दरवाजे पूरब की ओर होते हैं. लेकिन, मढौरा के गढदेवी मंदिर में पूजा करने वाली मुख्य मंदिर का गेट पश्चिम की तरफ है. देश में यह पहला मंदिर है, जहां पूजा करने वाली गेट पश्चिम की तरफ है.

नवरात्र के मौके पर प्रतिदिन शाम में होने वाली आरती यहां काफी भव्य होती है जिसमें सैकड़ो लोग शामिल होते हैं. मंदिर के पुजारी टूकाई बाबा का कहना है कि यहां आने वाले भक्तों की मन्नतें पूरी होती है.

