इस विधि से करें नवरात्रि का ‘हवन व पारण’

अखिल भारतीय ब्राह्मण सेवा न्यास हिलसा के कोषाध्यक्ष सौरभ पांडेय ने नवरात्रि का हवन पूर्णाहुति एवं पारण के संदर्भ में लोगों के बीच बन रही भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए कहा कि 11 अक्टूबर को हवन की पूर्णाहुति होगी और 12 अक्टूबर को कलश विसर्जन के बाद पारण करें। इस बार नवमी को भूल से पारण न करें। आइए आपको इसकी वजह बताते हैं।

नवमी तिथि के कारण महाष्टमी और महानवमी एक ही दिन हो जा रहा

उन्होंने कहा कि क्षयवती नवमी तिथि के कारण महाष्टमी और महानवमी एक ही दिन हो जा रहा है। माता दुर्गा का प्राण- प्रतिष्ठा तिथि सप्तमी और मूल नक्षत्र के योग 9 अक्टूबर बुधवार को मध्याह्न मे किया जाएगा।

सामान्यत: माता – बहन गोदी भरने का कार्य प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही आरम्भ कर देती है जो नवमी तक चलता है । इस हिसाब से यह कार्य 9 अक्टूबर बुधवार मध्याह्न बेला से 11 अक्टूबर शुक्रवार तक कर सकते है।

इस बार नवमी को पारण बिल्कुल न करें, कलश विसर्जन के बाद ही सर्वोत्तम

नवरात्र व्रत का पारण का नियम कलश विसर्जन विजया दशमी को ही शास्त्रोक्त है। कभी -कभी व्रत करने वाले भक्त नवमी को ही कन्याकुमारी के भोजनोपरांत ही भोजन कर लेते थे। जो इस बार एकदम से नहीं करना है । क्योंकि इस बार महाष्टमी और नवमी एक ही दिन है। इससे व्रत भंग हो जाएगा।

इसीलिए पारण कलश विसर्जन दशमी दिनांक 12 अक्टूबर शनिवार को प्रात: करे। आचार्य दिलीप पांडेय ने भी इन बातो का समर्थन करते हुए बताया कि ऐसा ही व्रत निर्णय पूर्व के सामुहिक बैठक मे तय हुआ था । जिससे किसी तरह के भ्रम का निर्माण ना हो सके। नियमानुसार व्रत करने से व्रत का फल अनंत गुणा मिलता है।

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