‘पार्टी का नाम और सिंबल दोनों लेंगे, चाचा को सटने नहीं देंगे’, चिराग की खुली चुनौती

पटना : चिराग पासवान ने आज दावा किया कि लोग जनशक्ति पार्टी (LJP) का नाम और उसका चुनाव चिन्ह बंग्ला बहुत जल्द उनको मिलेगा. साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि चाचा पशुपति पारस के साथ मिलकर चलना अब संभव नहीं है.

LJP का स्थापना दिवस 

दरअसल, आज से 25 साल पहले 28 अक्टूबर 2000 को रामविलास पासवान ने लोग जनशक्ति पार्टी (LJP) का गठन किया था. रामविलास पासवान द्वारा गठित लोक जनशक्ति पार्टी का आज 25 वां स्थापना दिवस समारोह है. आज चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास का स्थापना दिवस समारोह पार्टी कार्यालय एक व्हीलर रोड में मनाया गया.

शिवसेना और एनसीपी की तरह फैसला संभव 

चिराग पासवान के पार्टी के नाम और सिंबल के दावे पर वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय का कहना है कि, जिस तरीके से महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी को लेकर निर्वाचन आयोग ने फैसला दिया था. अब यह संभव है कि बिहार में भी लोग जनशक्ति पार्टी के नाम और सिंबल को लेकर निर्वाचन आयोग कोई फैसला ले.

बिल्डिंग से पुरानी यादें जुड़ी हैं 

पार्टी की स्थापना दिवस समारोह पर चिराग पासवान ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पार्टी यह स्थापना दिवस गांधी मैदान में मनाने का फैसला किया था. लेकिन पार्टी कार्यालय आवंटित होने के बाद कार्यकर्ताओं ने इसी पार्टी कार्यालय में स्थापना दिवस मनाने का फैसला किया. इस बिल्डिंग से पुरानी यादें जुड़ी हुई है. आज इस कार्यालय में स्थापना दिवस समारोह करके बहुत खुशी हो रही है.

‘चाचा से कोई समझौता नहीं’ 

चिराग पासवान ने आज एक बार फिर से साफ कर दिया कि परिवार से अलग होने का फैसला उनके चाचा पशुपति कुमार पारस का था. जब पशुपति कुमार पारस उन लोगों से अलग हुए थे तो उन्होंने उनकी मां और उनको रामविलास पासवान के खून का हिस्सा नहीं माना था. वह परिवार में बड़े थे लेकिन जिस तरीके से उन्होंने उनको परिवार से अलग किया. अब शायद संभव नहीं है कि वे लोग कभी एक हो सकते हैं.

असली वारिस की लड़ाई 

रामविलास पासवान के निधन के बाद उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस और रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान में राजनीतिक विरासत को लेकर जंग शुरू हुई. पार्टी की टूट के बाद भी दोनों नेता रामविलास पासवान की विरासत को आगे बढ़ाने की बात करते रहे. पार्टी में टूट के बाद भी दोनों पार्टी स्थापना दिवस मनाते आ रहे हैं.

4 साल से दो जगह स्थापना दिवस 

लोग जनशक्ति पार्टी का स्थापना दिवस समारोह पिछले 4 साल से दो जगह मनाया जाता है. आज भी पशुपति कुमार पारस खगड़िया के अपने पैतृक गांव शहरबन्नी में पार्टी का स्थापना दिवस मनाया. वहीं चिराग पासवान 4 वर्षों के बाद अपने पिताजी के पार्टी कार्यालय एक व्हीलर रोड में स्थापना दिवस समारोह मनाया.

चिराग का संकल्प 

लोक जनशक्ति पार्टी में टूट के बाद चिराग पासवान राजनीतिक रूप से अकेले हो गए थे. पशुपति कुमार पारस केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. लेकिन विरासत की जंग के समय ही चिराग पासवान ने कहा था कि वह अपने पिताजी के सभी अरमान को पूरा करेंगे.

1. रामविलास की विरासत 

राजनीति में अकेले पड़ चुके चिराग पासवान ने हिम्मत नहीं हारी. चिराग पासवान ने पूरे बिहार में बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट का विजन लेकर सभी जिलों का दौर शुरू किया. रामविलास पासवान के पुत्र होने के नाते लोजपा कार्यकर्ताओं का झुकाव चिराग पासवान के साथ दिखने लगा. यह उनकी पहली जीत थी. बिहार यात्रा के दौरान जिस तरीके से उनकी सभा में भीड़ जुटी थी उसके बाद धीरे-धीरे बीजेपी भी उनके प्रति सहानुभूति रखने लगी.

2. उपचुनाव में बीजेपी को समर्थन 

एनडीए में नहीं रहते हुए भी चिराग पासवान ने बिहार विधानसभा की तीन सीटों के उप चुनाव में बीजेपी का समर्थन किया. मोकामा, गोपालगंज एवं कुढ़नी उपचुनाव में चिराग पासवान ने खुलकर भाजपा का साथ दिया और बीजेपी के प्रत्याशियों के पक्ष में रोड शो एवं रैलियां की. इसके बाद साफ हो गया कि चिराग पासवान की एनडीए में वापसी हो रही है.

3. NDA में वापसी 

2024 लोकसभा चुनाव से पहले चिराग पासवान की एनडीए में वापसी हो गई. चिराग पासवान के एनडीए में वापसी के साथ ही पशुपति कुमार पारस राजनीति में अकेले पड़ने लगे. एनडीए ने पशुपति कुमार पारस को एक भी सीट नहीं दिया, जबकि चिराग पासवान की पार्टी को भाजपा ने 5 सीट दिया. लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी को सभी पांच सीटों पर जीत हासिल हुई. इस तरह चिराग पासवान ने पार्टी में हुई टूट का बदला अपने चाचा से ले लिया.

4. मोदी मंत्रिमंडल में जगह 

2024 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार एनडीए की सरकार का गठन हुआ. जिस मंत्रालय में कभी उनके पिताजी बैठा करते थे. उसके बाद उनके चाचा पशुपति कुमार पारस भी इस विभाग के मंत्री बने. मोदी सरकार में चिराग पासवान को वही मंत्रालय मिला. चिराग पासवान की यह चौथी बड़ी राजनीतिक जीत थी.

5. लोजपा का पुराना बंग्ला वापस 

पार्टी में टूट के बाद लोक जनशक्ति पार्टी का कार्यालय एक व्हीलर रोड राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी का कार्यालय बना. लेकिन लोकसभा में चुनाव की जीत के बाद चिराग पासवान ने फिर से उसे पार्टी ऑफिस को वापस लेने का संकल्प लिया. इसी माह 14 नवंबर 2024 को फिर से एक व्हिलर रोड स्थित वह कार्यालय फिर से चिराग पासवान को अलॉट कर दिया गया. यह चिराग पासवान की पांचवीं राजनीतिक जीत थी.

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