तेजस्वी के सामने कन्हैया बनेंगे कांग्रेस का विकल्प? बिहार चुनाव से पहले हुए सुपर एक्टिव

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है. बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावारु के आने के बाद पार्टी लगातार आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति बनाने में जुटी है. आज कांग्रेस के युवा चेहरा और एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार पटना आ रहे हैं.

सदाकत आश्रम में आज कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें कन्हैया कुमार और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी शामिल होंगे.

युवाओं पर फोकस: आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस युवाओं को लेकर विशेष रणनीति बना रही है. यही कारण है कि कांग्रेस के युवा चेहरे और एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार को बिहार चुनाव से पहले पटना भेजा गया है.

विधानसभा चुनाव से पहले कन्हैया कुमार द्वारा यात्रा निकालने की तैयारी हो रही है. यात्रा को लेकर आज रूपरेखा तैयार होगी. राहुल गांधी के हरी झंडी मिलने के बाद कन्हैया कुमार बिहार में यात्रा की शुरुआत की घोषणा करेंगे.

कन्हैया को लेकर लगा पोस्टर: कांग्रेस के युवा चेहरे कन्हैया कुमार के पटना आगमन को लेकर राजधानी पटना उनके स्वागत के लिए पोस्टर जगह-जगह लग चुके हैं. पोस्टर में कन्हैया कुमार के पटना आगमन को लेकर शुभकामनाएं दी गई है, जिसमें कन्हैया को बिहार की उम्मीद बताया गया है. एनएसयूआई के राष्ट्रीय महासचिव शशि कुमार उर्फ चुन्नू सिंह के द्वारा पटना में अनेक जगहों पर पोस्टर लगाए गए हैं.

युवा नेताओं की बैठक: पटना के सदाकत आश्रम में आज भारतीय राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी सह बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारु, एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार, भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी जुटेंगे. पार्टी में युवाओं को किस तरीके से जोड़ा जाए, इसको लेकर कांग्रेस यूथ विंग और स्टूडेंट विंग की बैठक बुलाई गई है. बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के संगठन में किस तरीके से युवाओं को जोड़ा जाए. इसको लेकर सभी दिग्गज बैठकर रणनीति बनाएंगे.

कांग्रेस के सामने चुनौती: वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि 1990 के बाद बिहार में कांग्रेस धीरे-धीरे कमजोर होती गई. कुछ समय को यदि छोड़ दिया जाए तो 2000ई के बाद बिहार की राजनीति में कांग्रेस पूर्ण रूप से आरजेडी पर ही निर्भर हो गया. भले ही कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है लेकिन बिहार में सभी नीतिगत फैसले में राजद की सहमति रहती है. विधानसभा का चुनाव हो या लोकसभा का चुनाव कांग्रेस राजद के वोट बैंक के भरोसे ही राजनीति करती रही है. यही कारण है कि बिहार में कांग्रेस का धीरे-धीरे जनाधार काम होता चला गया.

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