दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल को चारों खाने चित करने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बिहार को टारगेट किया है. बीजेपी की केंद्रीय इकाई के लिए भी बिहार प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कंधों पर बिहार फतह की जिम्मेदारी है. होली के बाद वह चुनाव अभियान की शुरुआत करने की तैयारी कर चुके हैं. उन्होंने गांधीनगर में कार्यक्रम के दौरान इसके संकेत भी दिए हैं.

अप्रवासी बिहारी पर बीजेपी की नजर: बड़ी संख्या में बिहार के लोग दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए पलायन करते हैं. इनकी संख्या लगभग 50 लाख के आसपास है. इस आबादी को साधने के लिए तमाम राजनीतिक दल एक्सरसाइज करते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी की नजर भी इस वोट बैंक पर है. उन्होंने तमाम बिहारी को चुनाव के दौरान अपने प्रदेश लौटने का अनुरोध भी किया है.

बिहार क्यों बीजेपी के लिए मजबूरी?: बिहार की राजनीतिक जमीन सबसे उर्वर है और बिहार से ही मोदी को कई बार चुनौती मिली है. विपक्ष की एकता की मुहिम बिहार से शुरू हुई थी हालांकि नरेंद्र मोदी अमित शाह ने विपक्ष की मुहिम पर लोकसभा चुनाव से पहले ही पानी फेर दिया था.

आजादी से पहले भी बिहार का महत्व: बिहार आजादी के पहले और आजादी के बाद जन आंदोलन का केंद्र रहा है. इस वजह से भाजपा किसी भी सूरत में बिहार को जीतना चाहती है. बिहार जीतने के बाद भाजपा को केंद्र सरकार के खिलाफ मजबूत आंदोलन का भय नहीं रहेगा.

एक आंकड़े के मुताबिक बिहार के 87% लोग राजनीतिक रूप से अच्छी समझ रखते हैं और राजनीतिक समझ के मामले में बिहार पूरे राष्ट्र में अव्वल है. यहीं से मुद्दों की सियासत को राजनीति की जमीन पर सींचा जाता है. बिहार के जनमानस भी देश की राजनीति को काफी प्रभावित करते हैं.

मिशन बिहार पर बीजेपी की तैयारी शुरू: दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अप्रत्याशित सफलता हासिल की है. पूर्वांचल और बिहार के लोगों की दिल्ली चुनाव को जीतने में अहम भूमिका थी.

इस वजह से कोई भी राजनीतिक दल बिहार को नजरअंदाज करना नहीं चाहता. ज्यादातर राजनीतिक दल की यह कोशिश होती है कि उनकी सोच और विचारधारा की छाप बिहारी जनमानस के हो. जिस वजह से तमाम राजनीतिक दलों के लिए बिहार हॉट केक है.