पटना. पीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। इसकी वजह से मंगलवार को 30 आॅपरेशन टालने पड़े। नौ मरीजों की मौत हो गई। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि हड़ताल की वजह से ये मौतें नहीं हुई हैं। यह सामान्य है। उधर हड़ताल का असर इमरजेंसी और वार्ड में दिखने लगा है। इमरजेंसी से कई मरीज अन्य अस्पतालों में चले गए। जो मरीज हैं, उनके अनुपात में चिकित्सक नहीं हैं।
हालातों पर नियंत्रण के लिए अस्पताल प्रशासन ने 50 डॉक्टर्स मांगे
शिशु विभाग में पीओडी के अलावा इंटर्नशिप करने वाले छात्रों की भी ड्यूटी लगाई गई है। अस्पताल प्रशासन ने सिविल सर्जन से 50 डॉक्टरों की मांग की है। लेकिन, शाम तक पांच चिकित्सक ही मिले। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सीनियर डॉक्टरों की भी ड्यूटी लगाई गई है।
दोपहर में कई मरीजों के परिजनों ने शिकायत की कि डॉक्टर अभी तक देखने नहीं आए हैं। मरीज को किसी तरह की परेशानी होने पर नर्स कहती हैं-अभी हड़ताल है। इंतजार करना पड़ेगा। नर्स से ही सुझाव लेना पड़ रहा है। दिन में तो डॉक्टर दिख जा रहे हैं। परेशानी रात में होती है।
हड़ताल से मरीज के साथ-साथ परिजन भी परेशान दिख रहे हैं। गरीब मरीजों का प्राइवेट अस्पताल में जाना संभव नहीं, इसलिए हड़ताल खत्म होने का इंतजार करने के अलावा उनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एक की जगह दो पीओडी और बाहर से आए डॉक्टरों को खासकर इमरजेंसी में तैनात किया गया है।
प्राचार्य डॉ. अजित कुमार वर्मा और अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि जूनियर डॉक्टरों से लगातार वार्ता हो रही है। उनकी कुछ मांगें पूरी भी हुई हैं। वे सभी मांगों को पूरा करने पर अडिग हैं। उस पर विचार किया जा रहा है। वहीं जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. शंकर भारती ने कहा कि अस्पताल प्रशासन से वार्ता हो रही है। लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय निकला है। सभी मांगें पूरी होते ही जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आएंगे। जूनियर डॉक्टर डॉ. दीनानाथ सिंह से मारपीट के मामले में पुलिस ने अनिल कुमार नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। लेकिन, असली आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है।