मुजफ्फरपुर, 10 अप्रैल। मुजफ्फरपुर में कायस्थ समाज के राजनीतिक सशक्तिकरण को लेकर एक बार फिर आवाज़ बुलंद हुई है। चित्रगुप्त एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने समाज के भीतर लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक षड्यंत्रों और आंतरिक विभाजन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

डॉ. सिन्हा ने अपने वक्तव्य में कहा कि विगत दशकों में समाज के कई योग्य और प्रभावशाली नेताओं को योजनाबद्ध तरीके से हाशिए पर डाल दिया गया। 1977 में कृष्ण नंदन सहाय, 1995 में मनोज श्रीवास्तव, 2000 में अरविंद मुकुल, और हाल के वर्षों में रवि अटल तथा पल्लवी सहाय जैसे नेताओं के साथ राजनीतिक अन्याय हुआ, जिसके पीछे आंतरिक मतभेद और संगठनों के भीतर का पक्षपात रहा।

उन्होंने चित्रगुप्त एसोसिएशन के कुछ पदाधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे बार-बार समाज के उम्मीदवारों का समर्थन करने के बजाय बाहरी नेताओं को तरजीह देते रहे हैं। इस कारण मुजफ्फरपुर जैसे शहर, जहाँ कायस्थ समाज की उल्लेखनीय जनसंख्या है, वहां भी समाज का कोई प्रतिनिधि महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों पर नहीं पहुँच सका।

डॉ. सिन्हा ने रामबाग काली मंदिर की मूर्ति स्थापना के दौरान हुए विवाद का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय समाज के एक युवा कार्यकर्ता को जेल भेजा गया, लेकिन समाज के वरिष्ठ नेताओं ने इस विषय में कोई सक्रियता नहीं दिखाई।

उन्होंने अध्यक्ष बनने की स्थिति में कई योजनाओं की घोषणा की है, जिनमें विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, शिक्षा एवं खेल प्रकोष्ठ की स्थापना, चित्रांश वृद्धाश्रम, हेल्पलाइन सेवा तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने की पहल शामिल हैं।

“अब समय है कि कायस्थ समाज संगठित होकर अपने हितों के लिए खड़ा हो। नेतृत्व में पारदर्शिता और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान की आवश्यकता है,” उन्होंने कहा।
डॉ. सिन्हा ने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे संगठित होकर एक ऐसा नेतृत्व चुनें जो न केवल कर्मठ हो, बल्कि निस्वार्थ भाव से समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष कर सके।


