मुजफ्फरपुर के लाल सिद्धार्थ कृष्ण ने UPSC में लहराया परचम, मिली 680वीं रैंक, माता-पिता और गुरु को दिया सफलता का श्रेय

मुजफ्फरपुर, बिहार: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के होनहार सिद्धार्थ कृष्ण ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे जिले का मान बढ़ाया है। उन्होंने 2024 की UPSC परीक्षा में 680वीं रैंक प्राप्त की है। यह सफलता केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार, जिले और राज्य के लिए गर्व का क्षण है।

सिद्धार्थ कृष्ण के पिता बिहार पुलिस सेवा में सब-इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत थे और वर्तमान में वे बेगूसराय जिले में डीएसपी के पद पर पदस्थापित हैं। उनकी सफलता के पीछे उनके माता-पिता का विशेष योगदान रहा है।

मां ने दी पढ़ाई में हमेशा प्रेरणा

सिद्धार्थ ने बताया कि उनकी पढ़ाई के सफर में उनकी मां ने हमेशा उनका साथ दिया। जब भी वह पढ़ाई के दौरान थक जाते या बीमार पड़ते, उनकी मां उन्हें हिम्मत देती और उनका विशेष ध्यान रखती थीं। सिद्धार्थ कहते हैं, “मेरी मां मेरी सबसे बड़ी ताकत रही हैं। उन्होंने मुझे कभी भी हिम्मत नहीं हारने दी।”

माता-पिता का विश्वास और आशीर्वाद बना सफलता की कुंजी

सिद्धार्थ की मां मृदुल यादव ने कहा, “जब बच्चे सफलता प्राप्त करते हैं तो इससे बड़ी खुशी किसी माता-पिता के लिए नहीं हो सकती। हमें शुरू से विश्वास था कि हमारा बेटा मेहनत और लगन से एक दिन जरूर सफलता प्राप्त करेगा, और आज वो दिन आ गया है।”

गुरुजनों और साथियों को भी दिया श्रेय

सिद्धार्थ ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने गुरुजनों और पढ़ाई में साथ देने वाले दोस्तों को भी दिया। उन्होंने कहा, “UPSC जैसी कठिन परीक्षा को पास करना सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास का भी परिणाम है।”

UPSC की यात्रा रही चुनौतीपूर्ण

सिद्धार्थ ने बताया कि UPSC की तैयारी के शुरुआती दिनों में प्रीलिम्स की परीक्षा ही बहुत कठिन लगती थी। “बहुत कम समय में अधिक प्रश्नों को हल करना एक अलग ही अनुभव था। लेकिन धीरे-धीरे मैंने खुद को मानसिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत किया और आज इस मुकाम तक पहुंच सका हूं,” उन्होंने कहा।

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा

सिद्धार्थ की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गौरव का विषय है, बल्कि वह बिहार के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं जो सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सिद्धार्थ ने साबित कर दिया है कि संकल्प, परिश्रम और समर्पण से कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता।

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