इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बिहार सरकार अलर्ट, घुसपैठियों पर पैनी नजर.. ‘नो मैन्स लैंड’ पर बुलडोजर एक्शन

पटना: बिहार के सीमावर्ती जिलों में भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन, सुरक्षा और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के कार्यों में तेजी आई है. इसके तहत सीमा स्तंभों (बॉर्डर पिलर) के रखरखाव और सत्यापन के लिए आधुनिक तकनीक और संयुक्त सर्वेक्षण का सहारा लिया जा रहा है.

बिहार सीमावर्ती जिलों में ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’

बिहार सरकार के मुताबिक, पूर्वी चम्पारण के 1,237 और मधुबनी के 358 स्तंभों की नियमित निगरानी की जा रही है, जबकि किशनगंज और सीतामढ़ी में क्षतिग्रस्त या गायब स्तंभों की मरम्मत के लिए ‘फील्ड सर्वे टीम’ द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. वहीं सुपौल जिले में सभी क्षतिग्रस्त स्तंभों की मरम्मत का कार्य पूरा हो गया है.

भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन पर बड़ी बैठक

बिहार के सीमावर्ती जिलों पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, मधुबनी, सीतामढ़ी, किशनगंज, सुपौल और अररिया जिला प्रशासन ने गुरुवार को भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन और विकास कार्यों की समीक्षा के बाद महत्वपूर्ण प्रगति रिपोर्ट साझा की

एक्शन मोड में बिहार सरकार

उन्होंने बताया कि, मधुबनी में पहचान की गई सभी 186 अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया गया है, जबकि किशनगंज में पिछले एक महीने में सभी 34 चिन्हित अतिक्रमण हटा दिए गए हैं. पश्चिमी चम्पारण में भी 272 में से 261 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, और शेष के लिए नेपाली अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है.

जाली नोट गिरोह पर बड़ी कार्रवाई

अपराध नियंत्रण और जाली करेंसी के खिलाफ चलाए गए अभियान में पूर्वी चम्पारण में हाल ही में 18,500 भारतीय और 25 लाख नेपाली जाली नोटों के साथ 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि सीतामढ़ी में 49 लाख नेपाली और 20,100 भारतीय जाली नोट बरामद किए गए हैं. इसके अतिरिक्त, फर्जी पहचान पत्र और आधार कार्ड बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोहों का भंडाफोड़ करते हुए मधुबनी और अररिया में कई गिरफ्तारियां की गई हैं.

बिहार सीमा से अवैध घुसपैठ पर भी कड़ी नजर

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा विदेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है, जिसके तहत उज्बेकिस्तान, बांग्लादेश, चीन और अमेरिका जैसे देशों के नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है. बैठक में बताया गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II’ के तहत सैकड़ों गांवों का चयन किया गया है.

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