जहानाबाद: बिहार के जहानाबाद जिले के कड़ौना थाना क्षेत्र स्थित आवासीय विद्यालय में बीते दिन एक पांच वर्षीय मासूम छात्र के साथ दरिंदगी और हत्या की घटना सामने आई थी. पुलिस ने इस मामले का सफल उद्भेदन करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस अधीक्षक अपराजित लोहान ने पूरी घटना का खुलासा किया, जिसमें वैज्ञानिक साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर सच्चाई सामने आई.

जहानाबाद में 5 साल के मासूम से दुष्कर्म
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ मनीष चंद्र चौधरी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई. प्रारंभिक जांच में हॉस्टल संचालक तरुण कुमार उर्फ गांधी पर संदेह हुआ, जिसे गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया. आगे की जांच के दौरान पाली थाना क्षेत्र के रहने वाले कैंटीन गार्ड मुकेश कुमार उर्फ सुदामा की भूमिका संदिग्ध पाई गई. सीसीटीवी फुटेज में भी आरोपी की गतिविधियां संदिग्ध नजर आईं.

नपुंसक कहकर चिढ़ाया, इसलिए गार्ड ने मार डाला
कड़ी पूछताछ में मुकेश कुमार उर्फ सुदामा ने अपराध स्वीकार कर लिया. उसने बताया कि वह अकेला जीवन व्यतीत कर रहा था, परिवार से अलग-थलग पड़ गया था और पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई थी. हॉस्टल के बच्चों द्वारा उसे नपुंसक कहकर चिढ़ाए जाने से वह मानसिक रूप से तनावग्रस्त और आक्रोशित रहता था. हॉस्टल संचालक से भी उसके संबंध अच्छे नहीं थे और वह हॉस्टल को बदनाम कर बंद करवाना चाहता था. इन्हीं कारणों से उसने यह जघन्य वारदात को अंजाम दिया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि
पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मासूम छात्र के साथ दुष्कर्म (अप्राकृतिक यौनाचार) और हत्या की पुष्टि हुई है. रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ने पहले बच्चे के साथ जघन्य कृत्य किया और फिर ब्लेड जैसी नुकीली वस्तु से उसकी निर्मम हत्या कर दी.

आरोपी के खिलाफ स्पीडी ट्रायल की तैयारी
एसपी अपराजित लोहान ने बताया कि आरोपी मुकेश कुमार उर्फ सुदामा के खिलाफ तेजी से मुकदमा चलाया जाएगा ताकि उसे जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाई जा सके. पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और आरोपी के बयान के आधार पर मजबूत केस तैयार किया है. हॉस्टल संचालक तरुण कुमार उर्फ गांधी की भूमिका की भी जांच जारी है.

10 दिन पहले हॉस्टल गया था छात्र
यह घटना हॉस्टलों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है. अभिभावक अब निजी छात्रावासों में बच्चों को भेजने से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर सख्ती से सवाल कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि छात्र करीब 10 दिन पहले ही हॉस्टल में आया था.

