निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती: 7% से अधिक फीस बढ़ोतरी पर लगा ब्रेक, आयुक्त ने दिए कड़े निर्देश

मुजफ्फरपुर: निजी विद्यालयों के कुशल प्रबंधन, पारदर्शी संचालन तथा अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत दिलाने के उद्देश्य से प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह की अध्यक्षता में आयुक्त कार्यालय सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में आयुक्त द्वारा सरकारी दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप निजी विद्यालयों के संचालन को सुनिश्चित कराने तथा उनकी मनमानी एवं अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और अभिभावकों के हितों की रक्षा हो सके।

आयुक्त ने बैठक में बिहार निजी विद्यालय शुल्क (विनियमन अधिनियम) 2019 का उल्लेख करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि इस अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाय। अधिनियम के अनुसार किसी भी निजी विद्यालय द्वारा वार्षिक शुल्क में अधिकतम 7 प्रतिशत तक ही वृद्धि की जा सकती है। इसके बावजूद कई विद्यालयों द्वारा बिना ठोस आधार के शुल्क में मनमानी वृद्धि किये जाने की शिकायतें प्राप्त होती रही हैं, जिसे गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने इसे अवैध एवं अनुचित करार दिया।
इस संबंध में आयुक्त ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में संचालित निजी विद्यालयों के प्रभावी नियंत्रण के निमित्त नियमित निरीक्षण एवं निगरानी करें तथा शुल्क संरचना सहित अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए निर्धारित प्रपत्र में प्रतिवेदन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि निरीक्षण कार्य को गंभीरता से लिया जाए और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाये जाने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।

बैठक में पाठ्य पुस्तकों एवं विद्यालय यूनिफॉर्म को लेकर भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए। आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि किसी भी निजी विद्यालय द्वारा अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से पुस्तक अथवा यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की बाध्यता पूर्णतः अनुचित है और इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है।

यूनिफॉर्म के संबंध में आयुक्त ने सुझाव दिया कि विद्यालय ऐसे रंग एवं डिजाइन का यूनिफॉर्म चयन करें जो सर्वसुलभ हो, ताकि अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दुकान से इसे क्रय कर सकें। इससे न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि विद्यालयों की निष्पक्षता पर भी कोई प्रश्नचिह्न नहीं उठेगा।

आयुक्त ने अभिभावकों की शिकायतों के त्वरित निवारण हेतु प्रत्येक जिले में कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अभिभावक अपनी शिकायतें आसानी से दर्ज करा सकें। साथ ही, कंट्रोल रूम में शिकायतों का पंजी संधारित किया जाए तथा प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।

बैठक के दौरान सरकारी विद्यालयों की स्थिति की भी जिलावार समीक्षा की गई। आयुक्त ने विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता, शिक्षा की गुणवत्ता, नियमित निरीक्षण एवं निगरानी व्यवस्था, सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा लंबित न्यायालयीय मामलों एवं शिकायतों के निष्पादन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
उन्होंने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करें और इसकी रिपोर्ट समय-समय पर उपलब्ध कराएं।

 

साथ ही, विद्यालयों में छात्र -छात्राओं के नामांकन एवं उनकी उपस्थिति बढ़ाने, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।
आयुक्त ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों के समग्र विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं नैतिक विकास के उन्नयन पर बल देते हुए विद्यालयों में खेलकूद गतिविधियों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराए गए खेल के मैदानों का उपयोग अधिक से अधिक किया जाए, ताकि छात्र-छात्राओं को खेल एवं शारीरिक गतिविधियों के पर्याप्त अवसर मिल सकें। इससे उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास में सहायता मिलेगी।

अंत में प्रमंडलीय आयुक्त ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दिए गए दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, अनुशासन एवं गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। यह बैठक निजी विद्यालयों में व्याप्त अनियमितताओं पर अंकुश लगाने, अभिभावकों को राहत प्रदान करने तथा शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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