नीतीश के आखिरी कैबिनेट की बैठक में छलके जज़्बात, आंसुओं के बीच नीतीश की मंत्रियों के साथ हुई मीटिंग

पटना : पटना की सियासत इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां जज़्बात और जम्हूरियत दोनों आमने-सामने नजर आ रहे हैं। बिहार कैबिनेट की आख़िरी बैठक के बाद ब्रीफिंग का रद्द होना इस बात का साफ इशारा है कि अंदरखाने माहौल कितना भावुक और संजीदा था। सत्ता के इस ट्रांज़िशन ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि नेताओं के दिलों में भी एक अजीब सी कसक छोड़ दी है।

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बताया कि बैठक के दौरान सभी मंत्री भावुक हो गए थे, हालांकि नीतीश कुमार पूरे वक्त संयमित और सामान्य नजर आए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह इस्तीफा देने के लिए लोकभवन जाएंगे यानी अब नीतीश युग की औपचारिक विदाई तय हो चुकी है। नीतीश कैबिनेट नेअपने अंतिम फैसला में कैबिनेट को भंग करने का फैसला  लिया है। नीतीश कैबिनेट भंग हो गई है और इसकी सूचना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजपाल को अपनी इस्तीफा के साथ दे देंगे । 3:15 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजपाल को अपना इस्तीफा  देंगे।

 

इससे पहले सुबह नीतीश कुमार ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपने दिन की शुरुआत की। इस मौके पर उनके साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। यह दृश्य एक तरफ सम्मान का प्रतीक था, तो दूसरी तरफ बदलती सियासी तस्वीर की झलक भी।

कैबिनेट बैठक के बाद अब निगाहें एनडीए विधानमंडल दल की अहम बैठक पर टिकी हैं, जिसे सत्ता के नए समीकरण की कुंजी माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। सियासी गलियारों में हलचल इस कदर तेज है कि हर कोई यह जानने को बेताब है कि आखिर अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।

इस बीच जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा का बयान भी काफी चर्चा में है। उन्होंने इसे “14 करोड़ बिहारियों के लिए भावुक पल” बताते हुए कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व ने राज्य को नई पहचान दी। उनके मुताबिक, एक वक्त ऐसा था जब बिहारी होने पर शर्म महसूस होती थी, लेकिन नीतीश के दौर में बिहार की इज्ज़त और पहचान दोनों मजबूत हुई हैं।

साथ ही उन्होंने निशांत कुमार की सक्रियता का जिक्र करते हुए साफ संकेत दिया कि वह अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और संगठन को मजबूत कर रहे हैं। इसे सियासी विरासत और भविष्य की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, बिहार इस वक्त एक ऐतिहासिक पल का गवाह बन रहा है जहां एक तरफ भावनाओं से भरी विदाई है, तो दूसरी तरफ नई सत्ता और नए नेतृत्व की दस्तक। अब सबकी नजर उस ऐलान पर टिकी है, जो तय करेगा कि आने वाले वक्त में बिहार की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

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