भागलपुर में हेडमास्टर पर ग्रामीणों ने लगाया आरोप, कहा-भाड़े पर दे दिया LED टीवी, बच्चों की छह दिनों से ठप है पढ़ाई

भागलपुर: जिले के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत सैदपुर उच्च विद्यालय में पिछले 6 दिनों से स्मार्ट क्लास की व्यवस्था पूरी तरह बाधित है। सरकार जहाँ एक ओर स्कूलों को हाई-टेक बनाकर बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने का दावा कर रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्यों के लिए छात्रों की पढ़ाई की बलि दी जा रही है। स्कूल में स्मार्ट क्लास बंद होने से छात्र-छात्राओं के पाठ्यक्रम और सीखने की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ रहा है।

प्रखंड मुख्यालय में ‘भाड़े’ पर टीवी!

स्थानीय ग्रामीण निलेश कुमार सिंह और अन्य अभिभावकों ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने स्मार्ट क्लास में लगी LED TV को प्रखंड मुख्यालय में ‘भाड़े’ पर दे दिया है। जानकारी के अनुसार, प्रखंड मुख्यालय में इन दिनों जनगणना (Census) से संबंधित प्रशिक्षण कार्य चल रहा है। इस ट्रेनिंग के लिए स्कूलों से टीवी मंगवा लिए गए हैं, जिसके कारण विद्यालयों के स्मार्ट क्लास रूम में ताले लटक रहे हैं।

जिम्मेदारों के गोलमोल जवाब

जब ग्रामीणों ने इस अव्यवस्था को लेकर प्रधानाध्यापक से पूछताछ की, तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि प्रखंड नाजिर के निर्देश पर टीवी भेजा गया है। वहीं, दूसरी ओर जब प्रखंड के नाजिर रोहन कुमार से इस संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं दिया। अधिकारियों की इस चुप्पी ने शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश

ग्रामीणों का कहना है कि क्या बच्चों की शिक्षा से ज्यादा जरूरी सरकारी प्रशिक्षण के लिए स्कूल के संसाधनों का दोहन करना है? अभिभावकों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि एक तरफ जिला प्रशासन शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी तरफ प्रखंड स्तर के अधिकारी स्वयं ही व्यवस्था को बाधित कर रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि तुरंत टीवी वापस लाया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारू हो सके।

सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग

यह मामला सामने आने के बाद अब जिला शिक्षा पदाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जनगणना प्रशिक्षण के लिए टीवी की आवश्यकता थी, तो विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी, न कि बच्चों की लैब से उपकरण हटाना चाहिए था। अब देखना यह है कि प्रशासन इस लापरवाही पर क्या संज्ञान लेता है।

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