पटना : राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पटना हाई कोर्ट परिसर में शनिवार को उच्च स्तरीय मॉकड्रिल का आयोजन किया गया. यह अभ्यास आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS), बिहार द्वारा किया गया. जिसमें सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस बल, दमकल विभाग और चिकित्सा टीमों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया. मॉकड्रिल के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वित कार्रवाई की क्षमता का परीक्षण किया गया.

पटना हाई कोर्ट में मॉकड्रिल
मॉकड्रिल की शुरुआत हाई कोर्ट परिसर में आपातकालीन अलार्म बजाकर की गई. अलार्म बजते ही सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए पूरे परिसर को सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी. इस दौरान काल्पनिक आतंकी हमले और आग लगने जैसी परिस्थितियों का निर्माण किया गया. जिनसे निपटने के लिए सुरक्षा बलों ने निर्धारित मानक कार्यप्रणालियों (SOP) के अनुसार कार्रवाई की.

एजेंसियों के बीच जबरदस्त तालमेल
दमकल विभाग की टीमों ने आगजनी की स्थिति में बचाव अभियान चलाया, जबकि मेडिकल टीमों ने घायलों को प्राथमिक उपचार देने का अभ्यास किया. इसके साथ ही कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, निकासी मार्गों का उपयोग करने और आपदा प्रबंधन के उपायों की जानकारी भी दी गई. पूरे अभ्यास के दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और त्वरित निर्णय क्षमता का प्रदर्शन देखने को मिला.

‘सुरक्षा के दृष्टिकोण से अभ्यास महत्वपूर्ण’
इस अवसर पर पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू, न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद, बिहार के महाधिवक्ता प्रशांत कुमार शाही, अपर पुलिस महानिदेशक (ATS) पंकज कुमार दाराद सहित कई न्यायमूर्ति और वरीय अधिकारी उपस्थित रहे. सभी ने इस अभ्यास को सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया.

सर्च, इंटरसेप्शन और न्यूट्रलाइजेशन की प्रक्रिया
मॉकड्रिल के दौरान ATS बिहार ने आकस्मिक आतंकवादी परिदृश्य में रियल टाइम प्रतिक्रिया, संदिग्धों की सर्च, इंटरसेप्शन एवं न्यूट्रलाइजेशन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया. अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल तैयारी, आपसी समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत करना था.

