पटना: आज वट सावित्री व्रत है. आज के दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के करने से पति की लंबी आयु (उम्र) होती है. इसे सावित्री ने सत्यवान के लिए किया था. आज 16 मई शनिवार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि सुबह से वट सावित्री व्रत की पूजा हो रही है।

आज वट सावित्री व्रत
अपने सुहाग की रक्षा और पति की लंबी उम्र की कामना लेकर गुरुवार को पटना समेत मसौढ़ी अनुमंडल क्षेत्र में सुबह से ही सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर वट वृक्षों के नीचे पूजा-अर्चना के लिए जुटने लगीं. राम जानकी ठाकुरवाड़ी मंदिर, मणीचक धाम, कैलूचक, संघत पर स्थित वट वृक्षों समेत प्रखंड के दर्जनों मंदिरों व गांवों में बृहद पैमाने पर पूजा का आयोजन हुआ. राम जानकी ठाकुरवाड़ी मंदिर परिसर में सुबह 5 बजे से ही महिलाओं की कतार लग गई.


पति की लंबी उम्र के लिए व्रत
मणीचक धाम में भी हजारों की संख्या में सुहागिनें पूजा के लिए पहुंचीं. कैलूचक और संघत पर के वट वृक्षों के नीचे मेला सा नजारा दिखा. महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर कच्चे सूत का धागा लपेटा, फल-फूल, सिंदूर, अक्षत अर्पित कर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी और अखंड सौभाग्य का वरदान मांगा.

महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर पूजा की
मान्यता है कि वट सावित्री व्रत करने से पति दीर्घायु होते हैं और दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. इसी कामना के साथ महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा की. पूजा के बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया और प्रसाद वितरण किया.
वट सावित्री की पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर सुबह 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगा. जबकि अमावस्या तिथि की शुरुआत सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगा.

सावित्री और सत्यवान की कथा
वट सावित्री व्रत देवी सावित्री के अपने पति सत्यवान के प्रति समर्पण को बताता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर विदा हुए तो उस वक्त सावित्री ने अपनी बुद्धिमता से उन्हें रूकने पर मजबूर कर दिया और यमराज को सत्यवान के प्राण लौटाने वापस करना पड़ा. ऐसी मान्यता है कि सावित्री को पति सत्यवान के जीवन का वरदान वट वृक्ष के नीचे मिला था. तब से बरगद (वट वृक्ष) के पेड़ की पूजा का विधान है.