पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंत्रिमंडल के सभी 34 सदस्यों को जिला स्तर की जिम्मेदारी सौंप दी है. मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सभी मंत्री अगले आदेश तक संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री और जिला कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष होंगे. इस फैसले का मकसद विकास कार्यों की निगरानी को और प्रभावी बनाना है.
निशांत को प्रमुख जिले की जिम्मेदारी
निशांत को वैशाली जिले का प्रभारी बनाया गया है. वहीं वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी को पटना जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उन्हें नालंदा जिले का भी प्रभारी बनाया गया है. उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव को सारण जिले की जिम्मेदारी दी गई है.

चार मंत्रियों को दो-दो जिलों का प्रभार
सरकार ने चार मंत्रियों को एक से अधिक जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को पटना के अलावा नालंदा, श्रवण कुमार को पूर्वी चंपारण और शिवहर, विजय कुमार सिन्हा को गया और गोपालगंज तथा दिलीप कुमार जायसवाल को मुजफ्फरपुर और बांका जिले का प्रभारी बनाया गया है.


इस मंत्री को मुंगेर की जिम्मेदारी
लेशी सिंह को मधुबनी, रामकृपाल यादव को बेगूसराय, नीतीश मिश्र को भागलपुर, दामोदर रावत को समस्तीपुर, कुमार शैलेंद्र को दरभंगा और अशोक चौधरी को रोहतास जिले का प्रभारी बनाया गया है. जमा खान को जहानाबाद, मिथिलेश तिवारी को सहरसा, संजय कुमार सिंह को मुंगेर, दीपक प्रकाश को अरवल, श्रेयसी सिंह को सीतामढ़ी और बुलो मंडल को किशनगंज जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

इस व्यवस्था से प्रत्येक जिले में मंत्री स्तर पर सीधी निगरानी सुनिश्चित होगी. योजनाओं के क्रियान्वयन, जनसमस्याओं के समाधान और विकास परियोजनाओं की समीक्षा में तेजी आने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि जिला प्रभारी व्यवस्था से प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय बनेगा.
संगठनात्मक मजबूती का संदेश
यह फैसला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली को भी दर्शाता है. वे लगातार प्रशासन को और अधिक सक्रिय तथा जवाबदेह बनाने पर जोर दे रहे हैं. सभी मंत्रियों को क्षेत्रीय स्तर पर जिम्मेदारी देकर NDA सरकार ने विकास एजेंडे को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का रणनीतिक कदम उठाया है.

अगले आदेश तक लागू रहेगी व्यवस्था
मंत्रिमंडल सचिवालय की अधिसूचना में साफ किया गया है कि यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी. इस दौरान सभी प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में नियमित समीक्षा बैठकें करेंगे और रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपेंगे.