पटना, जमुई में भ्रष्ट इंजीनियर के ठिकानों पर EOU की रेड, 40 लाख से अधिक मिले; 2 करोड़ की काली कमाई

बिहार के एक भ्रष्ट अधिकारी इंजीनियर गोपाल कुमार पर आर्थिक अपराध इकाई(ईओयू) ने शिकंजा कस दिया है। झाझा में ग्रामीण कार्य प्रमंडल में तैनात कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार पर दो करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति बनाने का आरोप है। पटना और जमुई में उनके चार ठिकानों पर ईओयू की कार्रवाई की जा रही है जहां से चालीस लाख नगद, ज्वेलरी और प्रॉपर्टी के कागाजात बरामद किए गए हैं।

गोपाल कुमार जमुई में अपने आवास पर हैं जहां छापेमारी टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। जब ईओयू की रेड टीम पहुंची तो गोपाल कुमार ने घर में घुसने से मना कर दिया। वारंट दिखाने के बाद वे नरम पड़े। बताया जा रहा है कि जमुई से लेकर पटना और अन्य जिलों में उनकी कई संपत्तियां हैं। उनके खिलाफ आय से 81 प्रतिशत अधिक संपत्ति बनाने के आरोप में ईओयू में केस दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

पटना में मजिस्ट्रेट कॉलोनी जगत विला अपार्टमेंट में दूसरे तल्ले पर गोपाल कुमार किराय के मकान में रहते हैं। वहां ईओयू की कार्रवाई का जा रही है। यहीं से 40 लाख कैश मिले हैं। परिवार के लोग इसी फ्लैट में मौजूद हैं। पटना में दो ठिकानों पर रेड चल रहा है। दूसरा ठिकाना कंकरबाग के पूर्वी इंदिरा नगर में स्थित है। इसके अलावे जमुई में केकेएम कॉलेज के समीप किराए के आवास और उनके झाझा स्थित कार्यालय में रेड की कार्रवाई की जा रही है। ईओयू के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने इसकी जानकारी दी है। बरामदगी का आंकड़ा बढ़ सकता है। कई जमीनों की जानकारी मिल रही है। भ्रष्टाचार के प्रति सम्राट सरकार की जीरो टॉलेरेंस नीति के तहत यह कार्रवाई की जा रही है।

बताया गया कि विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी वारंट प्राप्त होने के बाद शनिवार सुबह छापेमारी की कार्रवाई शुरू की गई। तलाशी के दौरान टीम द्वारा संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक खातों का विवरण, निवेश संबंधी कागजात तथा अन्य वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों का कहना है कि मामले की प्रारंभिक जांच में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद तत्काल कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। फिलहाल सभी स्थानों पर तलाशी अभियान जारी है और कार्रवाई पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

इस कार्रवाई को राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त नीति का हिस्सा माना जा रहा है। आर्थिक अपराध इकाई की इस बड़ी कार्रवाई के बाद ग्रामीण कार्य विभाग सहित प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पिछले कुछ सालों में आर्थिक अपराध इकाई, विजिलेंस, इनकम टैक्स की कार्रवाई का रिकार्ड देखें तो साफ होता है कि इंजीनियर जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। उसके बाद पुलिस और राजस्व सेवा के कर्मी और अधिकारी आते हैं।

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