अजय कुमार पांडेय के अनुसार बेरोजगारी एक बहुत बड़ा समस्या बनती जा रही हैं।बहुत से युवा अपना रोजगार भी करना चाहते हैं तो रुपये के अभाव में अपना व्यवसाय नही कर पाते हैं, इसके लिये भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा काफी योजनायें लागू की गई हैं लेकिन बैंक के द्वारा तानाशाही रवैया के कारण इसका लाभ हम गरीब नही उठा पा रहे है।
किसानों के लिये भी कई योजनाएं सरकार द्वारा लागू की गई है जिसमे प्रमुख योजना किसान क्रेडिट कार्ड(kcc) है। इसमे भी बिचौलिये के माध्यम से 20 से 30%प्रतिशत रिश्वत या दलाली ले लिया जाता है, बिना बिचौलिये के खासकर ग्रामीण छेत्र में कोई काम नही होता है।सरकार द्वारा प्रायोजित कर्ज मुद्रा कर्ज में10 लाख तक बिना कोई सुरक्षा के बैंक को देना हैं लेकिन बैंक नही देती हैं।जबकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गाइड लाइन के अनुसार बैंक जिस छेत्र में अवस्तिथ हैं और जमा राशि ले रही हैं वो सभी जमा राशि का व्यवसाय उसी छेत्र में करना हैं, जबकि ऐसा होता नही हैं। हम गरीब बैंक में पैसा जमा करते हैं और वो पैसा बिहार से बाहर के व्यवसाइयों को कर्ज दे दिया जाता हैं, जैसे, नीरव मोदी, विजय माल्या इत्यादी।
जिस कर्ज पर हमलोगों का अधिकार हैं वो रुपये बैंक हमलोग से लेकर बाहर के व्यवसाइयों को देती हैं।बिहार को गरीब राज्य बनाने में बैंकों की अहम भूमिका है व्यवसाय करने के लिये कर्ज नही देती हैं जिस कारण हम बेरोजगार दिशा भ्रामित हो कर आत्महत्या, अपराध इत्यादी करने लगते हैं। अगर बैंक कुछ भाइयो को कर्ज देती भी हैं तो 6 महीना से साल भर दौरा कर कर्ज देती हैं।साथ ही दलालो के द्वारा 20 से 30 % तक रिश्वत ली जाती हैं।इतने दिनों में कई भाइयो का हौसला पस्त हो जाता है और व्यवसाय ठीक से नही कर पाते हैं जिस कारण कर्ज NPA हो जाता हैं उसके बाद बैंक का दवाब झेलना मुश्किल हो जाता हैं।
इन सभी मुद्दों पर सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार पांडेय एक मंच बनाकर सभी बेरोजगारों को बिजनेस के लिये कर्ज दिलवाने की बात कही है।