सोशल मीडिया पर शिक्षा मंत्री के खिलाफ बयानबाजीपड़ी भारी,शिक्षा विभाग ने विशिष्ट शिक्षक को किया निलंबित

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर के मोतीपुर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय साढ़ा कन्या के विशिष्ट शिक्षक राजेश कुमार को सोशल मीडिया पर बिहार के शिक्षा मंत्री के खिलाफ कथित राजनीतिक और अमर्यादित टिप्पणी करना भारी पड़ गया। शिक्षा विभाग ने मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। निलंबन के साथ ही शिक्षक को विभागीय कार्यवाही के अधीन कर दिया गया है।

मामले ने उस वक्त तूल पकड़ा, जब सोशल मीडिया पर शिक्षक राजेश कुमार की ओर से शिक्षा मंत्री, बिहार सरकार के संबंध में की गई कथित टिप्पणी विभाग के संज्ञान में आई। विभाग ने इसे सरकारी सेवक के आचरण से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी। जिला शिक्षा पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के कार्यालय की ओर से 17 अगस्त 2026 के माध्यम से राजेश कुमार से स्पष्टीकरण मांगा गया था।

विभागीय आदेश के अनुसार, शिक्षक के खिलाफ बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री के विरुद्ध राजनीतिक एवं अमर्यादित टिप्पणी करने, स्वेच्छाचारिता बरतने तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली-1976 और बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली, 2026 के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप पाया गया। इसके बाद विभाग ने निलंबन की कार्रवाई का फरमान जारी कर दिया।

निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राजेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही के अधीन किया जाता है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, मोतीपुर का कार्यालय निर्धारित किया गया है। आदेश के मुताबिक, उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षक महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर सरकारी शिक्षकों की गतिविधियों, राजनीतिक टिप्पणियों और सरकारी सेवक आचार नियमों को लेकर बहस छिड़ गई है। विभाग के सख्त कदम को लेकर शिक्षकों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

इस पूरे प्रकरण में विभाग ने प्रथम दृष्टया आरोपों को आधार बनाकर निलंबन की कार्रवाई की है। अब विभागीय कार्यवाही के दौरान शिक्षक का पक्ष, उनके स्पष्टीकरण और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाएगी। अंतिम स्थिति विभागीय जांच के निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सोशल मीडिया की एक कथित टिप्पणी ने सरकारी शिक्षक के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। विभाग का यह कदम दूसरे सरकारी कर्मियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर की गई राजनीतिक या अमर्यादित टिप्पणियां सरकारी सेवा आचार नियमों के दायरे में कार्रवाई का आधार बन सकती हैं।

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