बिहार में नदियों का उफान लगातार लोगों के लिए आफत बना हुआ है। नेपाल और तराई इलाकों में हो रही लगातार बारिश का असर गंडक नदी के जलस्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। गंडक के साथ गंगा भी कई इलाकों में तबाही मचा रही है। भागलपुर, खगड़िया, मुंगेर और कटिहार में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। नदियों के बढ़ते पानी ने गांवों के साथ-साथ सड़क, अस्पताल और शिक्षण संस्थानों को भी अपनी जद में लेना शुरू कर दिया है।

पटना में गंगा के जलस्तर में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन बाढ़ का संकट टला नहीं है। पुनपुन और सोन नदी के उफान ने राजधानी और आसपास के इलाकों में नई परेशानी खड़ी कर दी है। निचले इलाकों में जलजमाव बढ़ने से लोगों की मुश्किलें बरकरार हैं।

सारण के सोनपुर में बाढ़ के पानी में डूबने से महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई। वैशाली के राघोपुर में एक युवक और किशोर की जान चली गई। वहीं खगड़िया सदर प्रखंड के रहीमपुर में तीन साल के मासूम की डूबने से मौत हो गई। इन घटनाओं ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में खौफ और गम का माहौल पैदा कर दिया है।

खगड़िया के गोगरी प्रखंड के तीन और परबत्ता प्रखंड के पांच सरकारी अस्पताल बाढ़ की चपेट में हैं। कई स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पानी भर गया है। समस्तीपुर में बाढ़ के चलते 45 स्कूलों में पढ़ाई ठप है।भागलपुर के भवनाथपुर में एनएच-80 पर करीब दो फीट पानी बहने से भागलपुर-अकबरनगर मुख्य मार्ग पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित है। समस्तीपुर के मोहनपुर प्रखंड के डुमरी में शनिवार की मध्यरात्रि बांध टूटने से हालात और बिगड़ गए।

मुंगेर में महाने नदी के उफान से टेटिया बंबर के बरसंडा गांव के पास डायवर्जन बह गया। इससे थाना, अस्पताल और बाजार को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग कट गया है। पटना जिले में मिट्टी धंसने के कारण बिहटा-सरमेरा राष्ट्रीय पथ की एक लेन बंद करनी पड़ी।गंगा के जलस्तर में मनेर, दीघा और गांधी घाट पर कुछ कमी आई है, मगर खतरा अभी बरकरार है। मोकामा में एनएच-80 पर पानी चढ़ने से आवागमन प्रभावित है। लगातार बिगड़ते हालात के बीच प्रशासन के सामने राहत और बचाव अभियान को तेज रखने की बड़ी चुनौती है।