बिहार: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2028 में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन सूचीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह सूचीकरण सत्र 2026-28 के विद्यार्थियों के लिए किया जा रहा है। बोर्ड की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार ऑनलाइन सूचीकरण आवेदन भरने की अंतिम तारीख 24 सितंबर तय की गई है। वहीं, परीक्षा शुल्क 22 सितंबर तक ही जमा किया जा सकेगा। शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख के बीच दो दिन का अंतर रखा गया है, ताकि स्कूल और कॉलेज के प्रधान शुल्क जमा कर चुके विद्यार्थियों का आवेदन समय रहते पोर्टल पर पूरा कर सकें।
किस विद्यार्थी को कितना देना होगा शुल्क
बिहार बोर्ड से 10वीं पास नियमित कोटि और व्यावसायिक पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए कुल 515 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। स्वतंत्र कोटि के विद्यार्थियों को 915 रुपये देने होंगे। वहीं, दूसरे मान्यता प्राप्त बोर्ड से मैट्रिक पास नियमित विद्यार्थियों के लिए शुल्क 715 रुपये और स्वतंत्र कोटि के विद्यार्थियों के लिए 1115 रुपये तय किया गया है। अन्य बोर्ड से 10वीं पास विद्यार्थियों को अपने स्कूल या कॉलेज में मूल प्रवजन प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होगा।

फॉर्म दो हिस्सों में होगा, पहले से भरी जानकारी नहीं बदलेगी
बोर्ड ने सूचीकरण प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए आवेदन फॉर्म को दो हिस्सों में बांटा है। खंड ‘ए’ में ओएफएसएस प्रणाली के जरिए नामांकन के आधार पर विद्यार्थियों की जानकारी पहले से भरी होगी। इस खंड में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा। वहीं खंड ‘बी’ में विद्यार्थियों को अपनी बाकी जरूरी जानकारी खुद भरनी होगी। आवेदन भरते समय विद्यार्थियों को सभी विवरण ध्यान से दर्ज करने होंगे।

विद्यार्थी, अभिभावक और प्राचार्य के हस्ताक्षर जरूरी
आवेदन में दर्ज जानकारी की जांच के लिए बोर्ड की ओर से प्री-फिल्ड घोषणा पत्र डाउनलोड करने की व्यवस्था की गई है। विद्यार्थी को इस घोषणा पत्र पर अपने, अभिभावक और प्राचार्य के संयुक्त हस्ताक्षर कराने होंगे। इसके बाद हस्ताक्षरित घोषणा पत्र को पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
रद्द मान्यता वाले स्कूलों के विद्यार्थियों का नहीं होगा सूचीकरण
बिहार बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों या कॉलेजों की मान्यता रद्द या निलंबित है, वहां के विद्यार्थियों का सूचीकरण नहीं किया जाएगा। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को दी गई है।

