पटना: नेपाल में हो रही मूसलाधार बारिश का सीधा असर बिहार की नदियों पर पड़ने लगा है. गंडक नदी में लगभग चार लाख क्यूसेक पानी आने की संभावना जताई गई है. सारण जिले के अधिकारियों ने बाढ़ नियंत्रण से जुड़े सभी पदाधिकारियों और अभियंताओं को पूरी तरह अलर्ट रहने का निर्देश दिया है. वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज पर जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.

बिहार की नदियां उफान पर
बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम और चक्रवात अर्णब के कारण पिछले चार दिनों से बिहार में झमाझम बारिश हो रही थी. अब इसका असर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है. मौसम विभाग ने रविवार 27 सितंबर को राज्य के किसी भी जिले के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है. हालांकि, कोसी और बागमती नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि गंडक का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है.

मानसून ने सूखे आंकड़ों को दी कुछ राहत
चार दिनों की सक्रिय मानसूनी बारिश ने बिहार के सूखे आंकड़ों को कुछ राहत जरूर दी है. 48 घंटे की बादल संग झमाझम वर्षा के कारण मानसून सीजन के दौरान वर्षा की कमी 36 प्रतिशत से घटकर 32 प्रतिशत रह गई. मधुबनी के झंझारपुर में 68.8 मिमी सर्वाधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि पटना में 11.8 मिमी बारिश हुई.

आज भी इन जगहों पर बारिश
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार, रविवार से वर्षा की गतिविधियां कमजोर पड़ेंगी. अगले 24 घंटे के दौरान राजधानी सहित प्रदेश के सभी भागों में बादलों की आवाजाही के साथ कुछ स्थानों पर हल्की और छिटपुट वर्षा की संभावना है. उत्तर-पश्चिम भागों में पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, सिवान, गोपालगंज और सारण में मेघ गर्जन के साथ झमाझम वर्षा के आसार बताए गए हैं.

तापमान में बढ़ोतरी का पूर्वानुमान
अगले दो दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में चार से छह डिग्री की वृद्धि का पूर्वानुमान है. शनिवार को पटना का अधिकतम तापमान 27.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि पूर्णिया में 33.2 डिग्री सेल्सियस सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया. भोजपुर में 68 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चली। मौसम धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है.

आने वाले दिनों में मौसम सामान्य होने की उम्मीद
मौसम विभाग का कहना है कि 27 सितंबर से राज्य में भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है. पटना समेत कुछ हिस्सों में बादल छाए रह सकते हैं और छिटपुट बारिश या गरज-चमक की स्थिति बन सकती है. नेपाल से आने वाले पानी के कारण गंडक नदी पर नजर बनाए रखने की जरूरत है, लेकिन कुल मिलाकर मौसम में सुधार के संकेत साफ दिख रहे हैं.
