मुजफ्फरपुर: चुनाव आयोग से जुड़े हालिया विवाद और विपक्षी दलों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को लेकर मुजफ्फरपुर की मेयर निर्मला साहू ने सोमवार को अपने आवास पर प्रेस वार्ता की। उन्होंने निर्वाचन आयोग के हालिया संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कहा कि आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद कई मुद्दों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों और दावों की तस्वीर साफ हुई है।प्रेस वार्ता में भाजपा मुजफ्फरपुर पूर्वी के जिलाध्यक्ष विवेक कुमार, जिला प्रभारी रमेश श्रीवास्तव, जिला मीडिया टीम प्रभारी सह कोषाध्यक्ष डॉ. साकेत शुभम ठाकुर सहित पार्टी के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।


मेयर निर्मला साहू ने कहा कि निर्वाचन आयोग की बैठक और उसके बाद जारी संयुक्त प्रेस वक्तव्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) समेत प्रमुख निर्णयों को लेकर आयोग की स्थिति सामने रखी गई है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली से जुड़े मामलों पर राजनीतिक दलों को आरोप लगाने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों को आधार बनाना चाहिए।


उन्होंने 24 जून 2025 के मूल आदेश और SIR के विभिन्न चरणों से संबंधित समय-सारणी का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोग ने अपने हालिया बयान में निर्णय प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उनके अनुसार, इससे आयोग के सदस्यों के बीच कथित मतभेद को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी स्थिति सामने आई है।
कैबिनेट सचिव को पत्र के मुद्दे पर भी दी सफाई
कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर उठे राजनीतिक विवाद पर मेयर ने कहा कि आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह पत्र किसी नीतिगत निर्णय या SIR से संबंधित नहीं था। उन्होंने इसे अधिकारी की प्रतिनियुक्ति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़ा मामला बताया।

मेयर ने कहा कि समाचार रिपोर्ट या अपुष्ट दावों के आधार पर संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दलों से आधिकारिक स्पष्टीकरण और दस्तावेजों को सार्वजनिक बहस का आधार बनाने की अपील की।
फॉर्म-6 और SIR को लेकर भ्रम दूर करने की जरूरत
SIR के दौरान फॉर्म-6 के घोषणा-पत्र को लेकर उठे सवालों पर भी मेयर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस विषय में न्यायिक प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण को ध्यान में रखते हुए जनता के बीच सही जानकारी पहुंचाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पात्र नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना निर्वाचन व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के माध्यम से घर-घर संपर्क, प्रपत्रों का संग्रह और विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने जैसे प्रयास किए जाते हैं।

संवैधानिक संस्थाओं पर बहस तथ्यों के आधार पर हो : मेयर
मेयर निर्मला साहू ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े गंभीर आरोपों पर बहस तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से EVM और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर समय-समय पर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान EVM को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों तथा चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े विपक्ष के आरोपों का संदर्भ दिया। मेयर ने राफेल मामले में राहुल गांधी की टिप्पणी और बाद में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष बिना शर्त माफी मांगने के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि CAG की रिपोर्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विपक्षी दलों के बयानों को लेकर भी अलग-अलग समय पर राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और उसकी नीतियों पर सवाल उठाना पूरी तरह स्वाभाविक है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक चर्चा प्रमाण और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए।मेयर ने कहा कि निर्वाचन आयोग के हालिया संयुक्त वक्तव्य के बाद संबंधित मुद्दों को लेकर आयोग का पक्ष सामने आ चुका है। ऐसे में राजनीतिक दलों को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों के आधार पर जनता के सामने अपनी बात रखनी चाहिए।