मुजफ्फरपुर: महिला पीड़ित सहायता केंद्र की तीसरी वर्षगांठ मंगलवार को हर्षोल्लास और गरिमापूर्ण माहौल में मनाई गई। समारोह में महिला सुरक्षा, सम्मान, जागरूकता और पीड़ित महिलाओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को लेकर किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के दौरान केंद्र से जुड़े सदस्यों और पुलिस की भूमिका की भी सराहना की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आरती सिन्हा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मिठनपुरा थाना की महिला एएसआई ऋतुराज, थाना प्रभारी अजय कुमार, वार्ड पार्षद सैफ अली समेत महिला हेल्प डेस्क से जुड़े सदस्य मौजूद रहे।

समारोह के दौरान महिला सहायता केंद्र की तीन वर्षों की कार्ययात्रा पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि किसी पीड़ित महिला के लिए अपनी समस्या लेकर सामने आना आसान नहीं होता। ऐसे में उसकी बात को संवेदनशीलता से सुनना, उसे सुरक्षित वातावरण देना और जरूरत के अनुसार उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।


महिला सहायता केंद्र से जुड़े सदस्यों ने कहा कि केंद्र का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना और उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि मुश्किल परिस्थितियों में वे अकेली नहीं हैं।

मिठनपुरा थाना की महिला एएसआई ऋतुराज ने महिला सुरक्षा और सहायता के महत्व पर अपनी बात रखी। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि किसी भी तरह की परेशानी, उत्पीड़न या असुरक्षा की स्थिति में वे चुप न रहें और पुलिस अथवा महिला सहायता केंद्र से संपर्क करें।


उन्होंने महिला सहायता केंद्र से जुड़े सदस्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनना और उन्हें उचित सहायता दिलाने की दिशा में काम करना समाज के लिए महत्वपूर्ण प्रयास है।

मुख्य अतिथि सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने महिला सहायता केंद्र से जुड़े सदस्यों और पुलिसकर्मियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।


सिटी एसपी ने कहा कि पीड़ित महिलाओं को भरोसा देना और उन्हें न्याय की प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने महिला सहायता केंद्र से जुड़ी महिलाओं के समर्पण और सेवा भावना की भी सराहना की।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और समाज के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। जब महिलाएं अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखेंगी और पुलिस तथा सहायता केंद्र उन्हें संवेदनशीलता के साथ सुनेंगे, तो सुरक्षा और न्याय के प्रति विश्वास और मजबूत होगा।
समारोह में आरती सिन्हा, मोना लिसा राय, संजुला सिन्हा, मीरा कुमुद, सीमा रानी, सीमा श्रीवास्तव, पूर्णिमा श्रीवास्तव, रूपा श्रीवास्तव, चांदनी, सुमित्रा देवी, सपना, जलन, काजल अग्रवाल, अंजू वर्मा, अमृता कुमारी, रंजन ओझा, राकेश पटेल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

महिला पीड़ित सहायता केंद्र की तीसरी वर्षगांठ का यह आयोजन सिर्फ एक वर्षगांठ समारोह नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर भी बना।कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और जरूरत के समय हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।

समारोह का संदेश साफ रहा कि महिला सुरक्षा के लिए पुलिस की सक्रियता, समाज की संवेदनशीलता और महिलाओं का आत्मविश्वास—इन तीनों का साथ मिलकर आगे बढ़ना जरूरी है।