मुजफ्फरपुर: आमगोला स्थित शुभानंदी परिसर के प्रतिभा सभागार में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अवकाशप्राप्त राजभाषा अधिकारी विमल कुमार परिमल की पुस्तक मानस के प्रसंग और पात्र का लोकार्पण-उत्सव विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। विषय प्रवर्तन में पुस्तक पर विस्तार से बोलते हुए डॉ संजय पंकज ने कहा कि विमल जी की यह कृति मानस चिंतन के व्यापक और शाश्वत सार तत्व को समकालीन संदर्भों में निरूपित करती है।


भारतीय संस्कृति मानवीय मूल्यों की आचार संहिता है। रामचरितमानस के सारे पात्र जीवन जीने की कला बताते हैं। लेखक ने मानस के प्रेरक प्रसंगों को गंभीरतापूर्वक उजागर करते हुए चरित्र निर्माण के अनुरूप प्रतिपादित किया है। संग्रह के आलेख परिवार, समाज और मनुष्य जीवन के लिए उद्बोधक हैं। विमल परिमल ने संन्यस्त भाव से गृहस्थ आश्रम को अभिनंदित किया है। मानस हृदय को उदार, मन को विराट और आत्मा को पवित्र बनाता है।


मुख्यवक्ता डॉ पूनम सिन्हा ने कहा कि विमल परिमल ने बारीकी से मानस के प्रसंगों का विश्लेषण किया है। यह पुस्तक जीवन जीने का सूत्र बताती है। सादगी और विनम्रतापूर्वक लेखक ने मानस विषयक प्रसंग को आत्मसात करके समाज व्यापक किया है। डॉ त्रिविक्रम नारायण सिंह ने कहा कि मानस विषयक प्रसंग को लेखक ने विवेकपूर्ण विमर्श बना दिया है। उदयनारायण सिंह ने मानस की महिमा का समाजीकरण करने के लिए विमल जी को साधुवाद दिया और कहा कि पुस्तक प्रेरक, अनुकरणीय और ज्ञानात्मक है।


डॉ रणवीर राजन ने कहा कि मानस चिंतन में विमल जी ने संवेदनात्मक दृष्टिकोण से काम लिया है। अध्यक्षीय उद्गार में विनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि विकास भारती संस्था और सुगंध पत्रिका विमल कुमार परिमल की रचनात्मक सामाजिक देन तथा उपलब्धि रही है। मानस इनके सर्वाधिक प्रिय ग्रंथ हैं। प्रस्तुत पुस्तक में विमल जी ने मानस के मोतियों को चुन चुन कर सहेजा है। सरल और सहज भाषा इनकी विशेषता है।


एच एल गुप्ता ने कहा कि बैंक की व्यस्तता के बीच रहकर विमल कुमार परिमल ने अपने जीवंत रचनाकार को गतिशील रखा यह बड़ी बात है। श्रीमन्नारायण ने कहा कि यह पुस्तक पठनीय और संदेशपरक है। डॉ अनु शांडिल्य ने पुस्तक की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और कहा कि वर्तमान परिवेश में इसकी प्रासंगिकता है। डॉ आशा कुमारी ने कहा कि मानस से सच्चे मानवीय जीवन को जीने की प्रेरणा मिलती है।

आभार में पुस्तक के लेखक विमल कुमार परिमल ने कहा कि मेरे रचनात्मक विकास में परिवार, समाज और परिवेश का योगदान है। रामचरितमानस मेरा आदर्श है। मेरे जीवन-संघर्ष में मार्ग निर्देशित करने का काम रामचरितमानस ने ही किया है। समारोह में ब्रजभूषण शर्मा, राकेश कुमार सिंह, प्रेमभूषण, अनिल मिश्रा, विभु कुमारी, चैतन्य चेतन, प्रमोद आजाद,अमरेंद्र कुमार ने भी विचार व्यक्त करते हुए सार्थक सृजन के लिए विमल परिमल को बधाई दी।

पुस्तक के प्रकाशक प्रतिभा प्रकाशन के अजीत कुमार ने आभार प्रकट किया। डॉ केशव किशोर कनक ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आज के संवेदनहीन होते समय और टूटते संबंध को मानस चिंतन ही सुव्यवस्थित और संतुलित कर सकता है।
