बाल देखभाल संस्थानों से निकले युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए बिहार सरकार और यूनिसेफ ने मिलाया हाथ

बिहार सरकार के समाज कल्याण निदेशालय, बिहार केयर लीवर्स नेटवर्क (बीसीएलएन), यूनिसेफ और उदयन केयर ने बाल देखभाल संस्थानों से बाहर निकलने वाले युवाओं के बेहतर भविष्य और आत्मनिर्भरता के लिए मिलकर पहल की है। यह कॉन्क्लेव वर्ष 2023 में आयोजित पहले राज्यस्तरीय केयर लीवर्स सम्मेलन और उसके बाद बिहार केयर लीवर्स नेटवर्क (बीसीएलएन) को मजबूत करने तथा संस्थागत देखभाल से बाहर निकलने वाले युवाओं के लिए सहायता सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों की अगली कड़ी है।

बाल देखभाल संस्थानों से निकलने के बाद युवाओं को अक्सर अपनी पढ़ाई जारी रखने, रोजगार और रहने के लिए जगह तलाशने, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने, जरूरी दस्तावेज हासिल करने और मानसिक व सामाजिक सहयोग पाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनके लिए संस्थागत देखभाल के बाद मिलने वाली सहायता सेवाओं को मजबूत करना और विभिन्न विभागों व संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना जरूरी है, ताकि युवा आत्मविश्वास के साथ वयस्क जीवन में कदम रख सकें और आत्मनिर्भर होकर अपना जीवन जी सकें।

कार्यक्रम में संस्थागत देखभाल से बाहर निकल चुके युवाओं, सरकारी अधिकारियों, विकास से जुड़े सहयोगी संगठनों, कौशल विकास से जुड़ी एजेंसियों और नियोक्ताओं ने भाग लिया। सम्मेलन में इस बात पर चर्चा की गई कि आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे युवाओं को किस तरह व्यावहारिक सहयोग दिया जा सकता है। बिहार सरकार की समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने देखभाल संस्थाओं से बाहर निकलने वाले युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी महत्वाकांक्षाएं बनाए रखें, शिक्षा जारी रखें और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियाँ उनके सपनों की सीमा को नहीं बांध सकतीं।

डॉक्टर बनने के अपने सफर और रास्ते में आई चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने युवाओं को खुद पर संदेह न करने, मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किलों का सामना करने और सुरक्षित व आत्मनिर्भर भविष्य बनाने में भावनात्मक सहयोग और सकारात्मक सोच वाले दोस्तों का साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बिहार सरकार के समाज कल्याण निदेशालय की निदेशक इनायत खान ने कहा कि सरकारी संरक्षण में पले-बढ़े बच्चों की वयस्कता की तैयारी 18 वर्ष से पहले ही शुरू होनी चाहिए ताकि वे संस्थान से बाहर निकलने के बाद आत्मनिर्भर होकर अपना जीवन जी सकें। इस दौरान उनकी सुरक्षा, शिक्षा और जरूरी सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि वे संस्थान से बाहर निकलकर अपने जीवन की नई शुरुआत बेहतर तरीके से कर सकें।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संस्थान से निकलने वाले युवाओं को केवल संस्थागत सहयोग तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराने चाहिए। साथ ही, उनमें आत्मविश्वास विकसित करना जरूरी है, ताकि वे अपने फैसले खुद ले सकें और अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकें।

उदयन केयर की संस्थापक और मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. किरण मोदी ने कहा कि बाल देखभाल संस्थानों से निकलने वाले युवाओं को उनके कल्याण के लिए बनाई गई नीतियों और सरकारी प्रावधानों की जानकारी होना जरूरी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि युवाओं को अपने जीवन से जुड़े फैसलों में अपनी बात रखने और निर्णय प्रक्रिया में सार्थक भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए। कॉन्क्लेव में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि संस्थागत देखभाल से बाहर निकल चुके युवाओं को मिलने वाली सहायता से जुड़े फैसलों में उनकी भागीदारी भी सुनिश्चित हो। बिहार केयर लीवर्स नेटवर्क (बीसीएलएन) के सदस्यों ने अपने अनुभव, उपलब्धियां, चुनौतियां और आकांक्षाएं साझा कीं। इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं को उनके अधिकारों के हकदार के रूप में पहचान देना और उनके जीवन को प्रभावित करने वाले फैसलों में उनकी राय शामिल करना जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान केयर लीवर्स ने ‘प्यार, देखभाल और सहयोग का घोषणापत्र’ प्रस्तुत किया। उपलब्धियां हासिल करने वाले युवाओं को भी सम्मानित किया गया। साथ ही, गणमान्य अतिथियों ने एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया, जिसमें संस्थागत देखभाल से बाहर निकलने वाले युवाओं के अनुभवों, संघर्षों और उपलब्धियों को शामिल किया गया है।

कौशल विकास से जुड़ी संस्थाओं और नियोक्ताओं के साथ हुई चर्चा में युवाओं की शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस दौरान युवाओं को इन सुविधाओं से जोड़ने के लिए बिहार कौशल विकास मिशन, शिक्षा विभाग के करियर पोर्टल और करियर कार्ड, बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (बीबीओएसई), राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस), उद्योग विभाग, जीविका, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), होटल उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों और अन्य शैक्षणिक व कौशल विकास संस्थानों के साथ समन्वय की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम और राजस्थान से आए केयर लीवर्स नेटवर्क के प्रतिनिधियों ने युवाओं के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने, नेटवर्क को मजबूत करने और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाने से जुड़े अनुभव साझा किए। इस दौरान दूसरे राज्यों में किए जा रहे प्रयासों से सीखने और बिहार में केयर लीवर्स नेटवर्क (बीसीएलएन) को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा हुई। कॉन्क्लेव में हुई चर्चा के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य बाल देखभाल संस्थानों से निकलने वाले युवाओं को समय पर उनकी जरूरतों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर जीवन जी सकें।

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