गया. अंतरराज्यीय बैंक लुटेरा माधव दास 12 वर्षों बाद झारखंड में दबोचा गया। पुलिस के मुताबिक उसने 40 वारदातों में 70 करोड़ से ज्यादा की डकैती की है। धनबाद जिले के सहजानंद नगर से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गया पुलिस-एसटीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे पकड़ा गया।

12 वर्षों से वह बिहार व आसपास के पांच राज्यों की पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। पूर्व में ओड़िशा पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद वह पहचान छुपाकर झारखंड के धनबाद, जमशेदपुर एवं अन्य स्थानों पर रह रहा था।
अपने गुप्त ठिकाने से विभिन्न राज्यों में डकैती की साजिश रचता था और अपने गिरोह की मदद से उसे अंजाम देने में सफल हो जाता था। उसपर बैंक डकैतियों के अलावे हत्या, लूट एवं आर्म्स एक्ट के केस भी दर्ज हैं। गया पुलिस ने उसे पकड़ने के बाद पूछताछ की तो करीब चालीस कांड इसके खिलाफ सामने आए। अधिकांश मामले बैंक डकैती के हैं। गया जिले के परैया थाना के पहरा का रहने वाला है।
धनबाद के ठिकाने पर मिला है एक लॉकर
पुलिस की छापेमारी में इसके धनबाद स्थित ठिकाने से एक लॉकर, एक लैपटाप, फर्जी पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस एवं अन्य सामग्री मिली है। लैपटाप पुलिस खंगाल रही है, जिससे कई तरह के सुराग मिलने की संभावना है। इसकी ससुराल गया के लंगूराही में है।
डाका डालने टेम्पो से पहुंचता था पूरा गिरोह
कुख्यात माधव बिहार के अलावे झारखंड, छत्तीसगढ़, पं. बंगाल, ओड़िशा में आतंक मचा रखा था। डकैती करने में यह और इसका गिरोह एक्सपर्ट था। नाटकीय और फिल्मी अंदाज में भी इसने कई वारदातें कीं। ओड़िशा के अंगल जिले में गांधी मार्ग में आंध्रा बैंक के पास डकैती की वारदात कुछ इसी तरह की थी।
गत वर्ष अंजाम दी गई वारदात में यह अपने गिरोह को ऑटो में लेकर पहुंचा था। किसी को यह शंका भी नहीं थी कि ऑटो में डकैत हैं। वहां उसने तीन किलोग्राम सोना और 23 लाख की नकदी की लूट की थी। इसी प्रकार जून में राउरकेला में 44 लाख की डकैती कर ली थी। 2016 में ओड़िशा में चार ऐसे कांड किए थे। इसने पं. बंगाल में सबसे अधिक 14 के करीब वारदातों को अंजाम दिया था। पुलिस इसका विस्तृत आपराधिक इतिहास खंगाल रही है