आरक्षण की मांग को लेकर रेलवे ट्रैक पर बैठा गुर्जर समुदाय, कई ट्रेने हुई रद्द

गुर्जर समुदाय ने एक बार फिर शुरू किया आन्दोलन, गुर्जर समुदाय के लोग 5 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर सवाई माधोपुर के पास ट्रैक पर बैठ गए हैं। गुर्जरों ने सवाई माधोपुर के मलारना स्टेशन और नीमोदा रेलवे स्टेशन के बीच ट्रैक जाम कर लिया है। जिसके कारण दिल्ली और मुंबई के बीच ट्रेनों का आवागमन बंद हो गया।

रेलवे ट्रैक रोकने का असर अब कई राज्यों पर पड़ना शुरू हो गया है। देर रात तक आंदोलनकारी ट्रैक पर जमे रहे। लोग ट्रैक पर ही अलाव जलाकर बैठ गए। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का कहना है कि शुक्रवार शाम चार बजे तक का अल्टीमेटम था, जो कि खत्म हो चुका है। बैंसला की अगुआई में गुर्जरों ने ट्रैक रोका हुआ है। उनका कहना है कि इस बार समझौता नहीं होगा। अब उन्हें सीधे आरक्षण की चिट्ठी चाहिए।

आंदोलनकारियों का कहना है कि हमारे पास अच्छे मुख्यमंत्री और अच्छे प्रधानमंत्री हैं। हम चाहते हैं कि वे गुर्जर समुदाय की मांगों को सुनें। उनके लिए आरक्षण प्रदान करना कोई कठिन कार्य नहीं है।

बैंसला ने आंदोलनकारियों से कहा है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही आम आदमी, महिलाओं और व्यापारियों को भी कोई हानि नहीं होनी चाहिए। बैंसला ने इस आंदोलन की घोषणा महारना में महापंचायत करके की थी। राज्य पुलिस ने गुर्जर बहुल इलाकों में अलर्ट जारी कर रखा है जिसमें दौसा, भरतपुर और अजमेर शामिल हैं।

पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा डिविजन की 7 ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है। एक ट्रेन को रद्द कर दिया गया है। 3 ट्रेनों की दूरी कम कर दी गई है और एक को आधे रस्ते में कर दिया गया है।

गुर्जरों को चार अन्य समुदायों के साथ मिलकर वर्तमान में अति पिछड़ा वर्ग के तहत एक प्रतिशत का आरक्षण मिलता है। इसके साथ उन्हें पिछड़ा वर्ग के तहत भी आरक्षण मिलता है।

गुर्जरों की ओर से शुरू किए गए आंदोलन पर मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख दिखाया है। मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया और सदस्य जस्टिस महेशचंद्र शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिए है कि अगर आंदोलनकारी सड़क या फिर सार्वजनिक संपत्ति को हानि पहुंचाएं तो उनके खिलाफ बिना देरी किए कार्यवाही होनी चाहिए। आयोग ने 11 फरवरी को पुलिस महानिदेशक से रिपोर्ट तलब की है।

खंडपीठ की ओर से राज्य सरकार से दर्ज मामलों को लेकर भी सूचना मांगी गई है। राज्य सरकार से कहा गया है कि वह सूची दे कि गुर्जर आंदोलन के दौरान रेल और सड़क मार्ग को रोकने पर किस वर्ष में कितने लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। उपखंड मलारना डूंगर में पुलिस और प्रशासन के अफसर तो मौजूद हैं ही साथ ही धारा 144 भी लागू कर दी गई है। रेलवे के अफसर और कर्मचारी लगातार रेलवे ट्रैकों की निगरानी कर रहे है

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