
MUZAFFARPUR/VAISHALI (ARUN) : बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय शुक्रवार देर रात औचक निरीक्षण के क्रम में मुजफ्फरपुर और वैशाली पहुँचे जहाँ थानो के निरीक्षण के दौरान उन्होंने मुजफ्फरपुर के एक व वैशाली के तीन थानाध्यक्ष और एक मुंशी को लापरवाही बरतने और स्टेशन डायरी अद्यतन न होने के कारण एक्शन लेते हुये सस्पेंड कर दिया।

डीजीपी ने दल बल के साथ देर रात तक मुजफ्फरपुर के कई थानों का औचक निरीक्षण किया और कागजों व स्टेशन डायरियों को भी खंगाला। निरीक्षण के बाद डीजीपी जिला अतिथि गृह में कुछ देर के लिये विश्राम करने के उपरांत उनका काफिला वैशाली जिला पहुँचा जहाँ थानों के औचक निरीक्षण के क्रम में सदर, टाउन और औद्योगिक थानाध्यक्ष को लापरवाही बरतने और स्टेशन डायरी अद्यतन न होने के कारण सस्पेंड कर दिया।

इससे पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय शुक्रवार की रात सवा बारह बजे नगर थाने पर पहुंचे। निरीक्षण किया और स्टेशन डायरी देखी। स्टेशन डायरी अपडेट मिली। संतरी ड्यूटी पर तैनात था। डीजीपी को अचानक सामने देखकर कुछ समय के लिए वह घबरा गया। लेकिन ड्यूटी पर तैनात मिलने पर डीजीपी ने उसे शाबाशी दी। करीब सात मिनट तक वहां रुके। हाजत को चेक किया। ओडी पदाधिकारी से कई बिंदुओं पर पूछताछ की। स्टेशन डायरी पर कुछ लिखा, फिर वहां से निकल गए।

इसके बाद उनका काफिला मिठनपुरा थाने पर पहुंचा। थाने का दरवाजा बंद देख डीजीपी चौंक गए। खुद दरवाजा खोलकर अंदर घुसे। वहां सभी पुलिसकर्मी आराम फरमाते देख पुलिसकर्मियों की जमकर क्लास लगाई। थानाध्यक्ष के कक्ष में ताला लगा देख गरम हो गये। उन्होंने चाबी मंगाकर उसे खुद से खोला। थानेदार की कुर्सी पर बैठकर स्टेशन डायरी को बारीकी से चेक किया। स्टेशन डायरी अपडेट मिली।

इसके बाद स्टेशन डायरी पर लिखा और फिर वहां से वे काजीमोहम्मदपुर थाने पहुंचे। थाना पर स्टेशन डायरी अपडेट नहीं मिलने पर प्रभारी थानेदार बसंत सिंह को बुलाया। कारण पूछे जाने पर जवाब नहीं मिला तो डांट पिलाई। हाजत को भी चेक किया।

इस बीच डीजीपी के थाने पर पहुंचने की सूचना मिलते ही आनन-फानन में एसएसपी मनोज कुमार व अन्य पुलिस अधिकारी भी काजीमोहम्मदपुर थाने पर पहुंचे। स्टेशन डायरी अपडेट नहीं होने पर प्रभारी थानेदार बसंत सिंह पर कार्रवाई के लिए एसएसपी को आदेश देते हुये आगे की ओर निकल गये।

मीडिया से बात करते हुये उन्होंने कहा कि मिठनपुरा थानाध्यक्ष जो दो-तीन दिन पहले ही थाने में योगदान दिये हैं उन्हें थाना के बारे में ज्यादा कुछ जानकारी नहीं है, और थाना में कोई ज्यादा गड़बड़ी भी नहीं पाई गई है, इसलिये उन्हें माफ कर दिया गया है। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त करते हुये कहा कि नगर और मिठनपुरा थानाध्यक्ष द्वारा थाना दैनिकी को अद्यतन रखा गया था जो कि मेरा आदेश था कि थाना दैनिकी अद्यतन होनी चाहिये। थाना दैनिकी अद्यतन रखने से जनता की आधी शिकायतें तो यूं ही दूर हो जायेंगी।

उन्होंने कहा कि 32 वर्ष पूर्व जब मैंने भारतीय पुलिस सेवा में योगदान दिया था तो शहरी कुछ थानों को छोड़कर किसी थाना का अपना भवन नहीं था, किराये के मकान में, जर्जर कमरों, झोंपडियों में थाना का संचालन होता था। आज लगभग 80 प्रतिशत से अधिक थानों का अपना भवन बन चुका है, बिहार के थानों की स्थिति सुदृढ़ हो रही है। बाकी बचे थानों के लिये भूमि अधिग्रहण आदि कार्य हो रहे हैं जो प्रक्रिया में हैं। डीजीपी श्री पाण्डेय ने विश्वास जताते हुये कहा कि आने वाले दो वर्षों में बिहार का ऐसा कोई भी थाना नहीं होगा जिनका अपना भवन नहीं होगा।

विदित हो कि उन्होंने पटना के 2 थानों का औचक निरीक्षण किया था, जहां उन्होंने काम में लापरवाही बरतने पर 2 थानेदारों को सस्पेंड भी कर दिया था। इसी तरह 6 फरवरी को औचक निरीक्षण के दौरान वे नालंदा के दीपनगर थाना पहुँच कर थानाध्यक्ष की बेहतर कार्यशैली की सराहना करते हुये स्टेशन डायरी में नोट भी लिखा था।
गौरतलब हो कि डीजीपी का पदभार संभालने के बाद से ही गुप्तेश्वर पाण्डेय द्वारा लगातार पुलिस अधिकारियों को रात्रि गश्ती एवं पुलिस-पब्लिक संबंध पर काफी जोर देते रहे हैं। साथ ही साथ लगातार प्रदेश भर के थानों पर औचक निरीक्षण पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश भर में 1418 थाने हैं, वे कभी भी किसी भी थाने पर पहुँच सकते हैं।