सोशल मीडिया पर होने वाली ‘ट्रोलिंग’ और निजी हम’लों से कोई फर्क नहीं पड़ता : उर्मिला मातोंडकर

बॉलीवुड अदाकारा उर्मिला मातोंडकर का कहना है कि सोशल मीडिया पर होने वाली ‘खिंचाई’ और निजी हमलों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह राजनीति में लंबी पारी खेलने आई हैं। मातोंडकर हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुई हैं और उत्तर मुम्बई से चुनाव मैदान में हैं, जो भाजपा का गढ़ है। उर्मिला ने कहा कि यह चुनाव तय करेगा कि देश किस दिशा में जा रहा है और लोकतंत्र बच पाएगा कि नहीं।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ मैंने कभी कोई काम अधूरा नहीं छोड़ा, चाहे वह मेरी पढ़ाई हो या करियर। राजनीति में आने का फैसला भी मैंने सोच-समझकर किया है और मैं इसमें भी अपना शत प्रतिशत दूंगी। मेरा इरादा स्पष्ट है।’’

उर्मिला मातोंडकर

अदाकारा ने कहा, ‘‘ महिलाओं को समझना चाहिए कि राजनीति में रहने के लिए काफी संयम रखने की आवश्यकता होती है। मैं आलोचना समझती हूं, लेकिन मैं नकारात्मकता, बेहूदगी का भी सामना कर रही हूं। मैंने इन दिनों में कभी खुद के पीड़ित होने की बात नहीं कही। मैं यहां लंबी पारी खेलने के लिए हूं।’’

मातोंडकर का मुकाबला भाजपा के मौजूदा सांसद गोपाल शेट्टी से है। इस सीट पर 2014 में भाजपा उम्मीदवार शेट्टी ने कांग्रेस के संजय निरुपम को मात दी थी। उत्तर मुम्बई में 29 अप्रैल को मतदान होगा।

उर्मिला मातोंडकर

हाल ही में उर्मिला ने उर्मिला ने कहा था- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर बनी फिल्म केवल एक मजाक है, क्योंकि उन्होंने अपना कोई वादा पूरा नहीं किया। उर्मिला ने कहा- 56 इंच के सीने का दावा करने वाले कुछ भी करने में बुरी तरह विफल साबित हुए हैं। उन पर और उनके अधूरे वादों पर तो कॉमेडी फिल्म बननी चाहिए थी। इससे ज्यादा बुरा क्या हो सकता है कि लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री ने पांच साल में एक संवाददाता सम्मेलन नहीं किया।

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