
MUZAFFARPUR (ARUN KUMAR) : गुरुवार को शिवहर जिला में अवर निरीक्षक के पद पर योगदान दे रहे दरोगा राम परिक्षण गुप्ता उर्फ़ आरपी गुप्ता को तिरहुत प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक के आदेश पर बर्खास्त कर दिया है. आरपी गुप्ता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही थी, जिसके आधार पर दोषी पाते हुए उनके खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया अपनाई गई है. तिरहुत प्रक्षेत्र के जोनल आईजी ने इस सम्बन्ध में बताया है की बर्खस्तगी और विभागीय जांच की कार्रवाई से माननीय कोर्ट को आईजी कार्यालय द्वारा अवगत कराया जाएगा.

आरपी गुप्ता पर बिहार राज्य निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) ट्रैप का वर्ष 2007 का गंभीर मामला था, और इस मामले में पूर्व से उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही थी. जिसके चलते विभाग के द्वारा इन्हें पद से बर्खास्त किया गया था. बताया जाता है की आरपी गुप्ता की पुनर्बहाली हाईकोर्ट द्वारा विभागीय कार्रवाई की तकनीकी त्रुटियों के कारण कर दी गयी थी. हालाँकि विजिलेंस मामले में उन्हें न्यायलय द्वारा निर्दोष साबित नहीं किया गया था. न्यायलय के निर्देश पर आरपी गुप्ता के खिलाफ विभागीय जांच पुनः शुरू हुआ था. वरीय पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ने इस सम्बन्ध में पूर्व में ही स्पष्ट किया था की आरपी गुप्ता के विरुद्ध पुनः विभागीय करवाई चल रही है जिसे एक महीने में पूर्ण किया जाना है. जानकारी के अनुसार विभागीय जाँच टीम की रिपोर्ट में आरपी गुप्ता को दूसरी बार दोषी पाया गया है.

श्री गुप्ता द्वारा मुज़फ़्फ़रपुर में क्यूआरटी प्रभारी के पद पर रहते हुए भी उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई में असहयोगात्मक रवैया अपनाया जा रहा था, जबकि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समयबद्ध रूप से विभागीय करवाई पूर्ण नहीं होने के कारण न्यायलय की अवमानना की स्थिति शुरू हो गई थी. इसके आधार पर गम्भीर आरोपों के कारण जोनल आईजी नय्यर हसनैन खान के आदेश पर 28 फरवरी को मुजफ्फरपुर क्यूआरटी प्रभारी से पदमुक्त करते हुए प्रशासनिक दृष्टिकोण से श्री गुप्ता का स्थानांतरण शिवहर जिला कर दिया गया था.

मुजफ्फरपुर में पूर्व क्यूआरटी प्रभारी के पद पर योगदान देते हुए सट्टा, अवैध शराब की बरामदगी व कई कारोबारियों की गिरफ़्तारी, स्मैक बरामदगी के साथ कारोबारी की गिरफ़्तारी समेत कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां रही हैं. सबसे महत्वपूर्ण सदर थाना के भगवानपुर में मुथूट फाइनेंस से 32 किलो सोना लूटकांड के उद्भेदन और अपराधियों की गिरफ़्तारी में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

घटना के सम्बन्ध में मिली जानकारी के अनुसार 02 अगस्त 2007 में बोचहां थाना में तत्कालीन थानाध्यक्ष राम परिक्षण गुप्ता उर्फ़ आरपी गुप्ता को विजिलेंस ट्रैप के दौरान रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया था. बिहार राज्य निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) ने जांच के दौरान 01 लाख 60 हजार रुपये नगद के साथ 2 लाख 45 हजार सालाना प्रीमियम के दस्तावेज, मुजफ्फरपुर में जमीन और झारखण्ड के जमशेदपुर में मकान के कागजात मिले थे. जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 23 लाख रुपये बताई गयी थी. इस मामले में गिरफ्तार बोचहां थानेदार को पुलिस विभाग से बर्खास्त कर दिया गया था. हालाँकि आरपी गुप्ता के मामले में जांच के दौरान तकनीकी त्रुटियों के कारण आरपी गुप्ता को संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट के आदेश पर पुन: उन्होंने जिले में योगदान दिया.
