पांच महीने के बच्चे और सामान के साथ मजदूर महिला ने 34 किलोमीटर चलकर रोहतांग दर्रा पार किया

बर्फ की दीवारों को चीरती हुई सर्द हवाएं, चारों ओर बिछी बर्फ की मोटी चादर और खून जमा देने वाली ठंड के बीच रोहतांग दर्रा लांघने की बात सुनकर अच्छे-अच्छे सूरमाओं की हवा निकल जाती है। बीस फीट बर्फ के बीच रोहतांग दर्रा पैदल पार करना किसी बच्चे का खेल नहीं होता, लेकिन एक मां ने बर्फ का पहाड़ भी पार कसर गयी

पांच महीने के अपने लाल और दूसरा सामान उठाकर इस प्रवासी मजदूर महिला ने 34 किलोमीटर चलकर 13050 फीट रोहतांग दर्रा पार किया। बचाव दल की टीम महिला को रेस्क्यू करने आ गई थी, लेकिन महिला ने हिम्मत का परिचय देते हुए नारी सशक्तीकरण का संदेश दिया है। महिला ने साबित किया है कि नारी अगर मन में ठान लें तो वह अपराजिता है। नेपाल के जिला देलक के भेरी आंचल निवासी भरत और उनकी पत्नी कृष्णा ने कहा कि उनका परिवार हर वर्ष खेती करने के लिए नेपाल से मार्च में लाहौल के जाहलमा आते हैं।

इस बार रोहतांग दर्रा पर अधिक बर्फबारी होने से कुल्लू से राहनीनाला के आसपास प्रति सवारी 500 रुपये देकर पहुंचे। उनके साथ गांव के ही नीम बहादुर केसी, उनकी पत्नी कल्पना केसी, जाहलमा के पूरन, हकीम बहादुर बोहरा, टिका, जून खटका सहित कुल 9 लोग टैक्सी में राहलाफाल तक आए। यहां हिमखंड गिरने से मार्ग अवरुद्ध हो गया था।

राहनीनाला से सात किलोमीटर चढ़ाई चढ़कर रोहतांग पहुंचे। रेस्क्यू टीम कोकसर की मदद से वे लोग रोहतांग से 20 किमी तक करीब 6 घंटे चलकर कोकसर आए। कोकसर से फिर पैदल 7 किलोमीटर चलकर 3 घंटे में सिस्सू के समीप पहुंचे।

बचाव चौकी कोकसर के प्रभारी पवन ठाकुर ने कहा कि सूचना मिलते बचाव दल ने रेस्क्यू कर कोकसर तक बच्चे को सुरक्षित पहुंचाया। बहरहाल इस महिला की हिम्मत की हर कोई दाद दे रहा है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading