सुप्रीम कोर्ट ने वकील और सामाजिक कार्यकर्ता सुनील अह्या द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद चुनाव आयोग और यूनियन ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है। सुनील अह्या ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें वीवीपीएटी / ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत के मामले जेल भेजने के कानूनी प्रावधान को चुनौती दी गई थी। वर्तमान में शिकायत गलत पाए जाने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
चुनाव नियमों की धारा 49 एमए के अनुसार, अगर कोई शख्स ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर सवाल करता है या फिर ये आरोप लगाता है कि बटन दबाने पर किसी और पार्टी को वोट जा रहा है, तो गलत जानकारी देने के लिए आईपीसी की धारा 177 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। इस मामले में 6 महीने की जेल या 1000 रु का जुर्माना या फिर दोनों ही सजा का कानूनी प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट ने वकील सुनील अह्या की याचिका पर सुनवाई की जिसमें ईवीएम और वीवीपीएटी के बीच विसंगतियों के बारे में शिकायत दर्ज करने को गैर-आपराधिक कृत्य बनाए जाने की मांग की गई है। वकील सुनील अह्या का कहना है कि ये धारा मतदाता को वोट डालने के दौरान किसी गड़बड़ी पर शिकायत करने से रोकती है।
