उच्चतम न्यायालय लोकसभा चुनाव के दौरान ईवीएम से वीवीपैट पर्चियों के बेतरतीब मिलान की संख्या बढ़ाने की 21 विपक्षी दलों के नेताओं की पुनर्विचार याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। 25 अप्रैल को चंद्रबाबू नायडू समेत 21 विपक्षी दलों के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर वीवीपैट और ईवीएम के मिलान को पांच गुना बढ़ाने के आदेश में बदलाव करने की गुहार लगाई थी।
8 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को लोकसभा चुनाव की सभी संसदीय सीट के हर विधानसभा क्षेत्र में एक नहीं, बल्कि पांच वीवीपैट की पर्चियों का ईवीएम से औचक मिलान का निर्देश दिया था। नायडू के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेताओं ने मांग की है कि लोकसभा चुनाव के दौरान प्रत्येक सीट से कम से कम 50 प्रतिशत ईवीएम की वीवीपैट पर्चियों की जांच की जानी चाहिए।
पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि लोकसभा चुनाव के तीन चरणों के मतदान में ईवीएम और वीवीपीपैट की पर्चियों में मिलान न होने की खबर आई है। लिहाजा आठ अप्रैल के आदेश पर फिर से विचार किया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि ईवीएम के जरिए पड़ने वाले कुल वोटों में से 50 फीसदी का मिलान वीवीपैट से निकलने वाली पर्चियों से कराई जाए।