सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोईके खिलाफ यौन शोषणका आरोप लगाने वाली महिला ने चल रही जांच प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार कर दिया था। वहीं, महिला के इस फैसले के बाद जस्टिस गोगोई जांच पैनल के सामने पेश हुए थे। इस बीच, सीजेआई रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच पर चिंता व्यक्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को एक खुला पत्र लिखा गया है। पत्र को 300 से अधिक व्यक्तियों का समर्थन हासिल है, जिसमें वकील, कार्यकर्ता और कई गैर सरकारी संगठन भी शामिल हैं।
शिकायतकर्ता के फैसले के समर्थन में 300 महिलाएं इस पत्र में कहा गया है कि महिला की जांच प्रक्रिया से हटने के बाद भी जांच जारी रखकर और सीजेआई गोगोई को समन करके समिति ने खुद को अविश्वसनीय बना लिया है। उन्होंने सीजेआई के खिलाफ उत्पीड़न मामले में सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की है। पत्र में कहा गया है, ‘हम महिला के पैनल द्वारा जांच प्रक्रिया में शामिल ना होने के फैसले का समर्थन करते हैं।’ उन्होंने इस मामले में किसी बाहरी सदस्य के ना होने का मुद्दा भी उठाया है।
महिला ने जांच प्रक्रिया में शामिल होने से किया था इनकार 300 से अधिक महिलाओं ने प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट एट वर्कप्लेस एक्ट 2013 के तहत यौन उत्पीड़न की रोकथाम के प्रावधान को ध्यान में रखते हुए विशेष जांच समिति से इसकी सुनवाई करने की मांग की है। पहले भी महिलाओं ने न्यायाधीशों को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
इस पत्र में उन्होंने अपनी मांगों को दोहराया है। पत्र में महिला द्वारा जांच प्रक्रिया से हटने के पीछे दिए गए कारण को सही ठहराया गया है, विशेष रूप से शक्ति के असंतुलन के संदर्भ में, जहां एक तरफ महिला और दूसरी तरफ न्यायपालिका के वरिष्ठ सदस्यों को रखा गया है
महिला ने लगाए हैं सीजेआई पर यौन उत्पीड़न के आरोप इसके पहले, महिला अपने लिखित पत्र के साथ कमेटी के सामने पहुंची थी और उसने बताया था कि आखिर क्यों उसने यौन शोषण की शिकायत सात महीने के बाद की। महिला का कहना था कि बिना वकील के कमेटी के भीतर मुझे अपना पक्ष रखना काफी मानसिक पीड़ा दे रहा था। महिला ने बयान जारी करके कहा कि वह अब कमेटी की सुनवाई में हिस्सा नहीं लेगी।